विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
वृक्षमाता अमरता देवी व गौरा देवी को श्रद्धांजलि दी
पेड़ों की रक्षा के लिए बलिदान देने वाली अमरता देवी और पेड़ों का महत्व घर-घर पहुंचाने वाली गौरा देवी को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए गए।
पिथौरागढ़ – नेड़ा के फील्ड में आयोजित एक गोष्ठी में डॉ. तारासिंह ने कहा कि प्रकृति के साथ महिलाओं का निकट संबंध रहता है।
चाहे जंगल हो, बागवानी हो या पशुपालन व कृषि – पेड़ों की सुरक्षा में महिलाएं हमेशा आगे रही हैं।
इस दौरान उन्होंने कहा अमरता देवी ने खेजड़ी के पेड़ बचाने के लिए चिपको आंदोलन किया।
जोधपुर के राजा के लकड़हारों ने 363 महिलाओं-बच्चों को मार दिया, लेकिन पेड़ नहीं कटने दिए।
आज राजस्थान में उन्हें वृक्षमाता अमरता देवी के रूप में पूजा जाता है।
वहीं गौरा देवी ने टिहरी के रेणी गांव में पेड़ों की रक्षा के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया।
मैसूर से जूझती गौरा देवी गरीबी में कफन से विदा हो गईं। सरकार ने उनके बच्चों को नौकरी नहीं दी, लेकिन उनका त्याग आज भी याद किया जाता है।
इस दौरान सभा में उपस्थित
आनंदी देवी, रेखा पाण्डेय, नीमा मटेरा, कमला कोरंगा, इन्द्रा दसोनी, कविता जोखाल, लीला शर्मा, पुष्पा, दीपा, वन्दना आदि लोग मौजूद रहे,














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