पिथौरागढ़ भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ऋषेन्द्र महर द्वारा बयान जारी कर सरकार के निर्देश पर प्रशासन द्वारा लगाए गए तुगलकी फरमान का विरोध करते हुए कड़ी निंदा की।
महर ने कहा कि जिलाधिकारी द्वारा आदेश दिया गया है कि अब आम जन किसी भी विभाग के ऑफिस और बैठकों में फोन नहीं ले जा सकते बल्कि एंट्री करनी है
तो फोन बाहर जमा करवाना पड़ेगा, आखिर संचार क्रांति के दौर में प्रशासन क्या दिखाना चाह रहा है , शायद इसके एवज में प्रशासन अपनी मनमानी करने की तैयारी ने लगा है । महोदय मेरा प्रश्न है कि क्या आपके सभी कार्यालयों के हर कक्ष में सीसीटीवी कैमरा लगा है , ताकि जरूरत पड़ने पर आम जन उसको सूचना के अधिकार में प्राप्त कर सके, शायद नहीं लगा है।
आखिरकार ऐसा निर्देश देकर उन्होंने अपने विभागों में हो रही चोरी और भ्रष्टाचार से बचने का रास्ता साफ करने की कोशिश की है, कोई भी व्यक्ति अपने फोन से वीडियो , फोटो लेने का अधिकारी होता है , परन्तु कुछ विशेष जगहों ,कार्यालयों में जैसे सचिवालय, न्यायालय, इत्यादि अति गोपनीय स्थानों पर यह प्रतिबंधित होता है और वहां बिना अनुमति के वीडियो , फोटो लेना मना होता है। परन्तु यहाँ तो महोदय ने हर जगह ही फोन ले जाने से ही मना कर दिया है।
एक ओर जब अधिकारी अपनी सोशल मीडिया से लोगों के वीडियो बनाकर डालते है तो क्या वह उनसे पूछकर या सहमति लेकर उसे पोस्ट करते हैं। अगर जिलाधिकारी ने ऐसा निर्णय लेना ही था तो उन्होंने जन प्रतिनिधियों, सर्वदल के नेताओं, कर्मचारी संघ, व्यापार संघ, छात्र संघ, सीनियर सिटीजन संघ, छात्र संघ, टैक्सी यूनियन सहित अन्य सभी जन सरोकारों से जुड़े लोगों से सामूहिक बैठक कर निर्णय लेना चाहिए था, क्योंकि अधिकारी कोई भी हो उसका दायित्व है कि अगर वह आम जन के अधिकारी से जुड़े किसी भी विषय पर कोई निर्णय ले तो उसके लिए उन्होंने नैतिकता के आधार पर एक सहमति बनानी चाहिए, परंतु भाजपा राज में तो नौकरशाही अपने मन की मालिक है ।
सार्वजनिक बैठकों और सुनवाइयों में प्रदेश, जिला,पंचायत, नगर निगम, नगरपालिका ,नगरपंचायत ,ब्लॉक ,न्याय पंचायत, ग्राम सभा, क्षेत्र पंचायत के प्रतिनिधि सहित अन्य दलों के जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर आते है और उनके क्षेत्र की जनता का भी अधिकार है कि वह अपने प्रतिनिधि द्वारा किसी बड़े सम्बन्धी अधिकारी के सम्मुख रखी गई उनकी समस्याओं को देख और सुन सकें, यह उनका अधिकार है जिसे देश के असंविधान ने उन्हें दिया है और आप इसे ही छिन्ना चाह रहे हैं।
महर ने आरोप लगाया कि यह निर्णय सरकार और भाजपा के नेताओं के निर्देश पर लिया गया है ताकि अब इन आखिरी वर्ष में वो लोग खुलकर जनता के लिए आये धन की बंदरबांट करें और उसका सबूत भी न रहे। लेकिन हम यह होने नहीं देंगे हम इस हिटलरशाही के खिलाफ पर जोर से लामबंद है और जरूरत पड़ेगी तो आम जन और सभी सामाजिक संगठनों को साथ लेकर उग्र आंदोलन करने हेतु भी तैयार हैं।














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