- नारायण नगर। उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखंड एवं भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में देवभूमि उद्यमिता योजना के अंतर्गत एक दिवसीय उद्यमिता जागरूकता एवं ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन संत नारायण स्वामी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायण नगर में महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. डॉ. प्रेमलता कुमारी की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमिता, नवाचार, स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य प्रो. डॉ. प्रेमलता कुमारी, देवभूमि उद्यमिता योजना की नोडल अधिकारी डॉ. सारिका वर्मा, कार्यक्रम संयोजक श्री जयेंद्र विक्रम सिंह तथा महाविद्यालय के प्राध्यापकों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।
अपने उद्घाटन संबोधन में प्राचार्य प्रो. डॉ. प्रेमलता कुमारी ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि युवा वर्ग अपनी प्रतिभा, रचनात्मक सोच और स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग कर स्वरोजगार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में नए अवसर सृजित कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को पारंपरिक कौशल एवं स्थानीय संसाधनों को आधुनिक तकनीक और नवाचार से जोड़कर आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। 
देवभूमि उद्यमिता योजना की नोडल अधिकारी डॉ. सारिका वर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए योजना के उद्देश्यों तथा महाविद्यालय में पूर्व में आयोजित उद्यमिता संबंधी गतिविधियों एवं उनकी उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को आगामी बूट कैंप, उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) एवं मेगा स्टार्टअप समिट सहित योजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया।साथ ही डॉ मनीष नेगी ने भी अपने विचार रखे
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान से आए प्रोजेक्ट ऑफिसर श्री जयेंद्र विक्रम सिंह ने विद्यार्थियों को उद्यमिता की अवधारणा, नवाचार के विभिन्न आयामों तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी सफल उद्यम की शुरुआत किसी समस्या की पहचान और उसके व्यावहारिक समाधान के विचार से होती है। उन्होंने समस्याओं की पहचान, नए विचारों का सृजन, अवसरों का मूल्यांकन, रचनात्मक चिंतन तथा व्यावसायिक विचारों को बाजार तक पहुँचाने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों को स्टार्टअप एवं पारंपरिक व्यवसाय के बीच अंतर, व्यवसाय के लिए पूंजी जुटाने के विभिन्न स्रोतों तथा उद्यम स्थापना से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। साथ ही देवभूमि उद्यमिता योजना के अंतर्गत उपलब्ध प्रशिक्षण, मेंटरशिप, वेंचर डेवलपमेंट सपोर्ट, हैंड-होल्डिंग एवं वित्तीय सहायता जैसी सुविधाओं के बारे में भी विद्यार्थियों को अवगत कराया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी रुचि और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नए व्यावसायिक विचार विकसित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के साथ उद्यमिता एवं स्वरोजगार की संभावनाओं को लेकर संवाद भी किया गया। एम.ए. प्रथम सेमेस्टर के छात्र सुजल ने विद्यार्थियों की ओर से अपने विचार साझा किए साथ ही इन्हें पुरस्कृत किया गया कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. सारिका वर्मा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक प्रो. प्रेमलता पंत, डॉ. मनीष बेलवाल, डॉ. सुधीर कुमार तिवारी, डॉ. शिखा पांडे, डॉ. दिनेश कोहली, डॉ. अनुल हुडा, डॉ. विवेक आर्या, डॉ. मनोज कुमार आर्य, डॉ. शुभम सिंह, डॉ. कमलेश त्रिपाठी, डॉ. मुकेश पांडेय, डॉ. महेंद्र प्रसाद, डॉ. मनीष नेगी एवं डॉ. वंदिता कंडपाल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को रोजगार तलाशने के साथ-साथ रोजगार सृजित करने की दिशा में सोचने, स्थानीय संसाधनों को अवसरों में बदलने तथा नवाचार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।















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