Home उत्तराखंड बलिदानी पुत्र लेफ्टिनेंट हेमंत सिंह महर “शौर्य चक्र”की स्मृति को सम्मान स्थल पर देखकर भावुक हुए सेवानिवृत्त कर्नल गोविंद सिंह महर
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बलिदानी पुत्र लेफ्टिनेंट हेमंत सिंह महर “शौर्य चक्र”की स्मृति को सम्मान स्थल पर देखकर भावुक हुए सेवानिवृत्त कर्नल गोविंद सिंह महर

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पिथौरागढ़। शौर्य, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को समर्पित पूर्व सैनिक संगठन द्वारा निर्मित सैनिक सम्मान स्थल आज एक अत्यंत भावुक एवं गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बना, जब शौर्य चक्र से सम्मानित अमर शहीद बलिदानी लेफ्टिनेंट हेमंत सिंह महर के पिता सेवानिवृत्त कर्नल गोविंद सिंह महर ने सम्मान स्थल पहुंचकर अपने वीर पुत्र की स्मृतियों को नमन किया।

जनपद पिथौरागढ़ के समीप स्थित बिण गांव के मूल निवासी एवं वर्तमान में हल्द्वानी निवासी सेवानिवृत्त कर्नल गोविंद सिंह महर ने जनपद आगमन के उपरांत सर्वप्रथम सैनिक सम्मान स्थल का भ्रमण किया। उन्होंने पूर्व सैनिक संगठन द्वारा सैनिकों, वीर नारियों एवं शहीदों की गौरवगाथाओं के संरक्षण हेतु किए जा रहे कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए इसे जनपद के लिए एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी पहल बताया।

इस अवसर पर सैनिक सम्मान स्थल स्थित शहीद स्मारिका (वीरता गैलरी) में शौर्य चक्र विजेता बलिदानी लेफ्टिनेंट हेमंत सिंह महर के चित्र को विधिवत स्थापित किया गया।

अपने वीर पुत्र का चित्र स्मारिका पर अंकित होते देख कर्नल गोविंद सिंह महर भावुक हो उठे। नम आंखों से उन्होंने अपने पुत्र को सैनिक परंपरा के अनुरूप सलामी देकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित सभी लोगों के लिए यह क्षण गर्व, सम्मान और भावनाओं का अद्भुत संगम बन गया।

पूर्व सैनिक संगठन ने बताया कि सैनिक सम्मान स्थल पर जनपद के वीर शहीदों की स्मृतियों को स्थायी रूप से संरक्षित किया जा रहा है। साथ ही संगठन द्वारा विकसित डिजिटल पोर्टल पर भी इन वीरों के जीवन, शौर्य और बलिदान का इतिहास सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने वीरों के अद्वितीय योगदान से प्रेरणा प्राप्त कर सकें।

23 वर्ष की आयु में दिया सर्वोच्च बलिदान

शौर्य चक्र विजेता बलिदानी लेफ्टिनेंट हेमंत सिंह महर ने 12 जून 1999 को 7 गार्ड्स में कमीशन प्राप्त कर भारतीय सेना में सेवा प्रारंभ की। 19 सितंबर 2000 को कारगिल क्षेत्र के नौगांव सेक्टर में ऑपरेशन के दौरान दुश्मनों से भीषण मुठभेड़ में उन्होंने अदम्य साहस और नेतृत्व का परिचय देते हुए सात दुश्मनों को मार गिराया तथा उनकी कई चौकियों को ध्वस्त कर दिया। मातृभूमि की रक्षा करते हुए मात्र 23 वर्ष की आयु में उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया।

उनकी असाधारण वीरता एवं अद्वितीय साहस के लिए भारत सरकार द्वारा 15 अगस्त 2001 को उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष मयूख भट्ट,वरिष्ठ सलाहकार दिवाकर सिंह बोरा एवं क्षेत्र संयोजक भूपाल सिंह महर सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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