Home उत्तराखंड अग्निवीर योजना में दो वर्ष की सेवा अवधि बढ़ाने का निर्णय व्यापक पुनर्विचार की आवश्यकता को दर्शाता है : पूर्व सैनिक संगठन, पिथौरागढ़
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अग्निवीर योजना में दो वर्ष की सेवा अवधि बढ़ाने का निर्णय व्यापक पुनर्विचार की आवश्यकता को दर्शाता है : पूर्व सैनिक संगठन, पिथौरागढ़

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पिथौरागढ़

पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ का मानना है कि अग्निवीर योजना के अंतर्गत चार वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण करने वाले अग्निवीरों को अब दो वर्ष का अतिरिक्त सेवा अवसर देने का केंद्र सरकार का निर्णय एक महत्वपूर्ण विषय है। इस निर्णय का स्वागत केवल एक अस्थायी राहत के रूप में करने के बजाय इसके पीछे छिपे नीतिगत प्रश्नों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

वर्ष 2022 में जब अग्निपथ योजना लागू की गई थी, तब देश की परंपरागत सैन्य भर्ती व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया गया। भारतीय सशस्त्र सेनाओं की पहचान केवल उनकी आधुनिक युद्ध क्षमता से नहीं, बल्कि उनके अनुशासन, अनुभव, दीर्घकालिक सेवा परंपरा, नेतृत्व क्षमता और पीढ़ियों से विकसित सैनिक संस्कृति से भी रही है। इस व्यवस्था की अपनी एक मजबूत नींव रही है, जिसे तैयार होने में दशकों का समय लगा है।

इतने व्यापक और दूरगामी प्रभाव वाली नीति लागू करने से पहले इसके संभावित परिणामों का विस्तृत अध्ययन, सैन्य विशेषज्ञों से परामर्श तथा सीमित स्तर पर प्रायोगिक परीक्षण किया जाना चाहिए था। आवश्यकता थी कि किसी भी बड़े बदलाव को सीधे संपूर्ण सैन्य भर्ती व्यवस्था पर लागू करने के बजाय पहले चरणबद्ध तरीके से उसकी व्यवहारिकता, युद्धक क्षमता, सैनिकों के मनोबल, प्रशिक्षण, अनुभव और दीर्घकालिक सैन्य आवश्यकताओं का आकलन किया जाता।

आज जब योजना के पहले बैच के अग्निवीरों की चार वर्ष की सेवा अवधि पूरी होने जा रही है, तब सरकार द्वारा शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो वर्ष का अतिरिक्त सेवा अवसर देने का निर्णय यह सवाल खड़ा करता है कि क्या मूल योजना के सभी पहलुओं और उसके दूरगामी परिणामों का आकलन पर्याप्त रूप से किया गया था? यदि अब अतिरिक्त सेवा अवधि की आवश्यकता महसूस हो रही है, तो क्या यह मूल व्यवस्था की समीक्षा और उसमें मौजूद व्यावहारिक चुनौतियों पर पुनर्विचार करने का समय नहीं है?

हमारा स्पष्ट मत है कि देश की सैन्य भर्ती व्यवस्था कोई सामान्य प्रशासनिक प्रयोग नहीं है, जिसमें बार-बार बदलाव करके उसके परिणामों को परखा जाए। यह देश की सीमाओं की सुरक्षा, सैनिकों के जीवन, युवाओं के भविष्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय है। चार वर्ष की सीमित सेवा के बाद भविष्य की अनिश्चितता, स्थायी रोजगार की चुनौती, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सैनिक के रूप में विकसित अनुभव का दीर्घकालिक उपयोग जैसे प्रश्न आज भी महत्वपूर्ण हैं।

दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा अवधि निश्चित रूप से संबंधित अग्निवीरों को कुछ राहत और अतिरिक्त अवसर प्रदान करेगी, लेकिन यह मूल समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। अतिरिक्त दो वर्षों के बाद भी नियमित सैन्य सेवा में चयन की अनिश्चितता बनी रह सकती है। इसलिए केवल सेवा अवधि बढ़ाने को योजना की सभी कमियों का समाधान मानना उचित नहीं होगा।

पूर्व सैनिक संगठन यह भी मानता है कि भारतीय सेना की मजबूती केवल कम आयु के सैनिकों की संख्या बढ़ाने से सुनिश्चित नहीं होती। युद्ध के बदलते स्वरूप में तकनीक और युवा ऊर्जा जितनी आवश्यक हैं, उतना ही महत्वपूर्ण अनुभव, प्रशिक्षित नेतृत्व, सैनिकों के बीच आपसी तालमेल, रेजिमेंटल परंपराएं और लंबे समय में विकसित होने वाली व्यावसायिक दक्षता भी है। इन सभी पहलुओं का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

पूर्व सैनिक संगठन की प्रमुख मांग है कि :

1. अग्निवीर योजना की मूल संरचना और अब किए जा रहे बदलावों की व्यापक एवं निष्पक्ष समीक्षा की जाए।
2. देश की पुरानी और स्थापित नियमित सैनिक भर्ती व्यवस्था के गुणों, अनुभवों तथा उपयोगिता का पुनर्मूल्यांकन किया जाए।
3. किसी भी अंतिम नीतिगत निर्णय से पहले तीनों सेनाओं के सेवारत एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिक संगठनों, रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य भर्ती से जुड़े अनुभवी लोगों से सुझाव लिए जाएं।
4. युवाओं के भविष्य, रोजगार की स्थिरता, सैनिकों के सेवा लाभ, युद्धक क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर इस योजना के प्रभाव का स्वतंत्र अध्ययन कराया जाए।
5. आवश्यकता पड़ने पर अग्निवीर योजना की मूल संरचना में व्यापक संशोधन करते हुए देश की आवश्यकताओं के अनुरूप स्थायी, सुरक्षित और अनुभव आधारित सैन्य भर्ती व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।

हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारा उद्देश्य किसी सरकार या राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं, बल्कि भारतीय सशस्त्र सेनाओं की गरिमा, गौरवशाली परंपरा, सैन्य क्षमता और देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा करना है।

सेना देश की सुरक्षा का आधार है, किसी भी नीतिगत प्रयोग का माध्यम नहीं। सेना से जुड़े इतने महत्वपूर्ण निर्णयों में राजनीतिक परिस्थितियों अथवा तात्कालिक आवश्यकताओं के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के दीर्घकालिक हित सर्वोपरि होने चाहिए।

आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार इस विषय को प्रतिष्ठा का प्रश्न न बनाकर एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे के रूप में देखे। पूर्व सैनिकों के अनुभव और सुझावों को सम्मान देते हुए अग्निवीर योजना पर व्यापक पुनर्विचार किया जाए, ताकि देश की सीमाएं भी सुरक्षित रहें, सेना की गौरवशाली परंपरा भी अक्षुण्ण रहे और देश का युवा अपने सैनिक जीवन तथा भविष्य को लेकर आश्वस्त रह सके।

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