देवलथल (पिथौरागढ़
कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर कारगिल युद्ध में राष्ट्र की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर वीर शहीद हवलदार गिरीश सामंत (पैरा रेजीमेंट) की 27वीं पुण्यतिथि उनके पैतृक गांव देवलथल स्थित शहीद द्वार एवं स्मृति स्थल पर अत्यंत श्रद्धा, सम्मान और देशभक्ति के वातावरण में आयोजित की गई। कार्यक्रम में सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों, जनप्रतिनिधियों, स्कूली बच्चों तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने सहभागिता कर शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व सैनिक संगठन के धर्मगुरु नवीन गुरुरानी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। शहीद की वीरांगना श्रीमती शांति सामंत ने विधिवत पूजा-अर्चना कर अपने वीर पति को नमन किया। इसके उपरांत 130 पर्यावरण बटालियन, पूर्व सैनिक संगठन, असम रेजीमेंट के पूर्व सैनिकों, स्थानीय विधायक एवं अन्य गणमान्य नागरिकों ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा दो मिनट का मौन रखकर राष्ट्र के अमर सपूत को नमन किया।
कार्यक्रम में स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रेरणादायी प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत कर दिया। उपस्थित सभी वक्ताओं ने कहा कि सीमांत क्षेत्र में इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, त्याग, बलिदान और सैन्य परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं। सभी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए इसकी मुक्त कंठ से सराहना की।
पूर्व सैनिक संगठन द्वारा क्षेत्र में समाज एवं संगठन के लिए उत्कृष्ट योगदान देने वाले क्षेत्र संयोजक शंकर सिंह सामंत, किशन सिंह तथा श्याम दत्त जोशी को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं नॉर्थ हिल पब्लिक स्कूल सहित विभिन्न सहयोगियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। संगठन की ओर से शहीद की वीरांगना शांति सामंत को शहीद का चित्र भेंट कर सम्मानित किया गया। उन्होंने इस सम्मान के लिए भावुक होकर सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समाज इसी प्रकार अपने शहीदों को याद रखेगा तो आने वाली पीढ़ियां भी राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित होती रहेंगी।
पूर्व सैनिक संगठन के सचिव दयाल सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन केवल श्रद्धांजलि तक सीमित न रहकर राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा बनते हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि शहीदों की पुण्यतिथियों एवं स्मृति कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक स्वरूप दिया जाए। इन आयोजनों को स्थानीय मेले के रूप में विकसित करते हुए विभिन्न सरकारी विभागों के स्टॉल लगाए जाएं, जिससे एक ओर जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचे और दूसरी ओर बच्चों एवं युवाओं में देशभक्ति और सामाजिक चेतना का विस्तार हो। संगठन ने इस संबंध में जिला प्रशासन से औपचारिक पत्राचार एवं संवाद करने का भी निर्णय लिया।
कार्यक्रम में 130 पर्यावरण बटालियन से सूबेदार सुरेश सिंह, नायब सूबेदार सुरेश पाठक सहित जवान, डीडीहाट विधायक बिशन सिंह चुफाल, असम रेजीमेंट पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष श्याम दत्त जोशी साहब, नॉर्थ हिल पब्लिक स्कूल की प्रबंधक महिमा पाण्डेय, सीजल टमटा तथा विद्यालय के छात्र-छात्राएं, कैप्टन सुन्दर सिंह खड़ायत, राजेन्द्र सिंह, प्रयाग पाण्डेय, देविन्दर सिंह, श्रीमती लक्ष्मी चंद, दीपा जोशी, दीपा चुफाल सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन पूर्व सैनिक संगठन के उपाध्यक्ष रमेश सिंह महर साहब ने किया।
*कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि राष्ट्र अपने वीर सपूतों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता। सीमांत क्षेत्र की यह गौरवशाली परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी तथा शहीदों का सम्मान ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है














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