पिथौरागढ़।
डीडीहाट विकासखंड के ग्राम सभा ननपापो स्थित ईष्ट देव पंचमोड़ बाला जी मंदिर में भागीरथी देवी द्वारा आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का समापन धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रेरणादायी संदेश के साथ संपन्न हुआ।
समापन अवसर पर पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ (डीडीहाट इकाई) की पहल तथा वन कन्या प्रियंका पुजारी के विशेष सहयोग से भागीरथी कन्याल द्वारा मंदिर परिसर में बरगद (वट वृक्ष) का पौधा रोपित किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने इस पौधे के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लेते हुए पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का दायित्व बताया।
इस अवसर पर पूर्व सैनिकों ने क्षेत्रवासियों से अपील की कि धार्मिक आयोजनों को केवल पूजा-अर्चना तक सीमित न रखते हुए उन्हें पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन से भी जोड़ा जाए। प्रत्येक शुभ अवसर पर एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर सिद्ध होगा।
कार्यक्रम में मंदिर समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व सैनिक गोविंद सिंह कन्याल की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। उन्होंने इस मंदिर को वर्तमान स्वरूप प्रदान करने में वर्षों से महत्वपूर्ण योगदान दिया है और आज भी धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में पूर्व सैनिक समाज सेवा के साथ-साथ सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं एवं सामाजिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सतत प्रयास कर रहे हैं।
पूर्व सैनिक संगठन के सदस्यों ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद अब उनका दायित्व समाज, संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा एवं संरक्षण में भी उतनी ही सक्रिय भूमिका निभाना है। ऐसे आयोजन समाज में एकता, संस्कार और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।
इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व सैनिक गोविंद सिंह कन्याल, कर्नल गंगा सिंह कन्याल, कैप्टन नंदन सिंह चुफाल, कैप्टन हरीश सिंह, कैप्टन टिकेंद्र सिंह, कैप्टन जीवन सिंह कन्याल, कैप्टन प्रवीण कन्याल, जगदीश कन्याल, वन कन्या प्रियंका पुजारी सहित अनेक श्रद्धालु एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ ने भविष्य में भी धार्मिक, सामाजिक एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े ऐसे जनहितकारी कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।














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