पिथौरागढ़
पिथौरागढ़। पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 58वें दिन में प्रवेश कर गया। एक ओर आज प्रधानमंत्री द्वारा देवभूमि की वीर गाथाओं और सैनिकों के शौर्य का मंचों से विस्तृत उल्लेख किया गया, वहीं दूसरी ओर उसी भूमि के पूर्व सैनिक अपनी एक छोटी सी न्यायोचित मांग को लेकर पिछले 58 दिनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई तक नहीं हो रही।
धरना स्थल पर पूर्व सैनिकों ने तीखे शब्दों में कहा कि यह स्थिति सरकार के दोहरे रवैये को उजागर करती है। मंचों से सैनिकों के सम्मान की बातें करना और जमीनी स्तर पर उनकी समस्याओं को अनदेखा करना, यह केवल दिखावटी राजनीति का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस “डबल इंजन” सरकार में न तो संवेदनशीलता नजर आ रही है और न ही समस्याओं के समाधान की कोई गंभीर इच्छा।
पूर्व सैनिक संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार मानो “कुंभकरण की नींद” में सो चुकी है। उन्होंने कहा कि जब तक राजनीतिक हितों पर आंच नहीं आती, तब तक इस नींद के टूटने की संभावना भी कम ही दिखाई देती है। लेकिन जब यह नींद टूटेगी, तब यही पूर्व सैनिक, जिन्हें आज अनदेखा किया जा रहा है, सरकार के सामने मजबूती से खड़े होंगे।
पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने सम्मान, अधिकार और सीमांत जनपद के भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसके बावजूद यदि उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जाता है, तो यह सरकार के लिए भविष्य में गंभीर परिणाम लेकर आ सकता है।
संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह आंदोलन अब केवल धरना स्थल तक सीमित नहीं रहेगा। यदि शीघ्र ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो इसे व्यापक जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा और सरकार की कथनी और करनी का अंतर जनता के सामने उजागर किया जाएगा।
आज के धरने में कैप्टन आनंद सिंह (सेना मेडल), भूपेंद्र रावल, हरी नंदन जोशी, ललित मोहन जोशी, भगवान सिंह, नरेंद्र सिंह, दौलत सिंह, बलवंत सिंह, हरीश पथ तथा विक्रम सिंह सहित अनेक पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
पूर्व सैनिक संगठन ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन से अपील की है कि वे इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लें और पूर्व सैनिकों के साथ सम्मानजनक वार्ता कर शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें।














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