Home उत्तराखंड धरना 59वें दिन में प्रवेश — “मंचों पर वीरता के गीत, जमीन पर पूर्व सैनिकों की अनदेखी”
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धरना 59वें दिन में प्रवेश — “मंचों पर वीरता के गीत, जमीन पर पूर्व सैनिकों की अनदेखी”

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पिथौरागढ़। पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 59वें दिन में प्रवेश कर गया। लगभग दो महीनों से अधिक समय से अपने सम्मान, अधिकार और सीमांत के भविष्य के लिए संघर्षरत पूर्व सैनिकों की अनदेखी अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।

धरना स्थल पर पूर्व सैनिकों ने कहा कि एक ओर सरकार और प्रशासन बड़े-बड़े आयोजनों और मंचों के माध्यम से उत्तराखंड और सैनिकों की वीर गाथाओं का गुणगान कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उसी सीमांत क्षेत्र में अपने अधिकारों के लिए बैठे पूर्व सैनिकों की बात सुनने से सभी परहेज कर रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को “मुंह में राम, बगल में छुरी” की कहावत से जोड़ते हुए इसे केवल राजनीतिक दिखावा करार दिया।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि वे इस आंदोलन के माध्यम से किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि पूरे सीमांत क्षेत्र के भविष्य, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार के स्थायी अवसरों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण बटालियन जैसी महत्वपूर्ण इकाई केवल पिथौरागढ़ ही नहीं, बल्कि मुनस्यारी, धारचूला, बागेश्वर, चंपावत,अल्मोड़ा और खटीमा जैसे क्षेत्रों के लोगों/पूर्व सैनिकों को भी रोजगार प्रदान कर रही है, जिससे यह पूरे क्षेत्र की आर्थिक धरोहर बन चुकी है।

साथ हीआज पूर्व सैनिक संगठन द्वारा जनपद के नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक महोदय का स्वागत पर्यावरण के प्रतीक स्वरूप पौधा भेंट कर किया गया। इस माध्यम से संगठन ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया और सभी से इसमें सहयोग की अपील की।

साथ ही संगठन ने पुलिस अधीक्षक महोदय को ज्ञापन सौंपते हुए हाल ही में सोशल मीडिया पर पूर्व सैनिक संगठन एवं उसके पदाधिकारियों के प्रति अपमानजनक भाषा के प्रयोग पर उचित कार्रवाई की मांग की। संगठन ने स्पष्ट कहा कि इस प्रकार की भाषा न केवल पूर्व सैनिकों के सम्मान को ठेस पहुंचाती है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती है।

पूर्व सैनिकों ने कहा कि यह आंदोलन समाज, आने वाली पीढ़ियों और सीमांत क्षेत्र के संरक्षण के लिए है। इसके लिए सभी जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों का दायित्व बनता है कि वे एकजुट होकर इस मुद्दे को उठाएं। यदि समय रहते इस खतरे को नहीं समझा गया, तो भविष्य में इसका गंभीर नुकसान पूरे क्षेत्र को उठाना पड़ेगा।

संगठन ने सरकार और प्रशासन से शीघ्र सकारात्मक और ठोस कार्रवाई की अपेक्षा जताई है, ताकि इस सीमांत जनपद की आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।

आज के धरने में आनंद सिंह, नवीन गुरुरानी, राजेंद्र जोरा, श्याम विश्वकर्मा सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
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