उत्तराखंड –
जनपद में पूर्व सैनिक संगठन द्वारा चलाया जा रहा धरना आज 61वें दिन में प्रवेश कर गया। लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन को अब एक सकारात्मक दिशा मिलती हुई प्रतीत हो रही है। प्रशासन के साथ हुई सार्थक वार्ता के बाद आंदोलन को एक नई आशा और गति प्राप्त हुई है।
पिछले 61 दिनों से पर्यावरण संरक्षण एवं “130 पर्यावरण बटालियन” के विस्थापन के मुद्दे को लेकर पूर्व सैनिक एवं क्षेत्रवासी निरंतर संघर्षरत हैं। अब इस विषय पर केंद्र सरकार के साथ-साथ प्रदेश सरकार की सक्रियता भी सामने आई है। प्रशासन एवं संगठन को प्राप्त पत्रों के आधार पर यह संकेत मिल रहे हैं कि फिलहाल विस्थापन की प्रक्रिया को अस्थाई रूप से रोका गया है, जिससे क्षेत्र में राहत का माहौल बना है और लोगों ने कुछ हद तक संतोष की सांस ली है।
इसी क्रम में प्रशासन द्वारा संगठन के पदाधिकारियों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया, जहां जिलाधिकारी एवं उप जिलाधिकारी महोदय के साथ सकारात्मक और सार्थक चर्चा हुई। इस वार्ता से यह उम्मीद जगी है कि जल्द ही इस मुद्दे पर ठोस एवं सकारात्मक निर्णय सामने आएगा, जिससे आंदोलन को उचित दिशा मिलेगी।
पूर्व सैनिक संगठन ने स्पष्ट शब्दों में दोहराया है कि जनपद की इस ऐतिहासिक विरासत “130 पर्यावरण बटालियन” को किसी भी स्थिति में जनपद से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। संगठन का मानना है कि इस आंदोलन ने जनपद के भविष्य को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आगे भी पूर्व सैनिक जनहित के मुद्दों पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ खड़े रहेंगे।
संगठन ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में परिस्थितियों को देखते हुए आंदोलन को लेकर कोई सकारात्मक निर्णय लिया जा सकता है।
आज धरना स्थल पर देवलथल क्षेत्र से सूबेदार मेजर शंकर सामंत, कृष्णा सिंह, शेर सिंह, नवीन गुरुरानी, दयाल सिंह, राजेंद्र जोरा, गोपाल सिंह, श्याम विश्वकर्मा, संगठन उपाध्यक्ष एवं “पर्यावरण बचाओ, सीमांत बचाओ संघर्ष समिति” के अध्यक्ष रमेश सिंह महर सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।














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