पिथौरागढ़ :- कारगिल युद्ध के 26 वर्ष पूर्ण होने के साथ-साथ जनपद पिथौरागढ़ के कारगिल शहीद किशन सिंह सेना मेडल की पुण्यतिथि पर आज विपरीत मौसम के साथ श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शहीद के गौरवान्वित इतिहास को याद किया गया।
आपको बता दें की जून 1999 को आज ही के दिन कारगिल युद्ध के दौरान द्रास सेक्टर पर दुश्मनों के हौसलों को परास्त करते हुए 18 गढ़वाल राइफल द्वारा दुर्गम चोटियों पर फतह हासिल की थी,
और इसी युद्ध के दौरान अपनी असीम वीरता और पराक्रम को दिखाते हुए लांस नायक किशन सिंह भंडारी द्वारा देश के लिए अपनी शहादत दी थी।
उनकी वीरता को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। 
जिसके चलते आज उनकी 27वीं पुण्यतिथि पर शहीद के नाम से निर्मित शहीद द्वार जजुराली पर जाकर पूर्व सैनिक संगठन द्वारा शहीद के परिवार जनों ओर क्षेत्र वासियों के साथ श्रद्धांजली कार्यक्रम आयोजित किया गया।
आज विपरीत मौसम के बावजूद आम जन मानस के साथ पूर्व सैनिकों द्वारा शहीद को याद कर, ऐसे बलिदान को इस सैन्य जनपद की परंपरा कहा गया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम पर भारत मां की जय के जयकारों के साथ कार्यक्रम को देशभक्ति से परिपूर्ण कार्यक्रम बना दिया गया। अमर वीर के जयकारों से जहां गुरुंग घाटी गूंज उठी वही शहीद की वीरांगना तनुजा भंडारी* के नम आंखों से एक वीर नारी के गौरव को देखा जा सकता था,
जो अपने सुहाग को देश के लिए बलिदान करने के बाद आज हमारे नव युवाओ,आम जन मानस के लिए एक प्रेरणा स्वरूप श्रद्धांजलि अर्पित कर रही थी, और स्वयं से पहले देश के अमृत वाक्य को यथार्थ कर रही थी।
वीरांगना तनुजा भंडारी ने बताया कि शहीद के नाम पर एक शहीद द्वार की मांग को दो दशकों से लगातार उनके द्वारा उठाया जा रहा था, और पिछले वर्ष पूर्व सैनिक संगठन के माध्यम से इसे पूर्ण होता देखना एक विशेष अनुभूति थी और आज यह दिन ओर यह विशेष स्थान सभी के लिए प्रेरणा स्थल के तौर पर है यह उनके लिए सबसे बड़ा सुकून देने वाला एहसास है।
इस मौके पर पूर्व सैनिक संगठन द्वारा वीरांगना तनुजा भंडारी को शाल ओढाकर सम्मानित किया गया,
वहीं आज के कार्यक्रम पर पूर्व सैनिक संगठन के माध्यम से सचिव सु मेजर रमेश सिंह महर, दयाल सिंह, शेर सिंह, हरीश सिंह,भूपाल सिंह,राजेंद्र जोरा, हयात सिंह, श्याम विश्वकर्म, राजेंद्र सिंह बोहरा, नरेंद्र सिंह साहब आदि पूर्व सैनिकों सहित आम जनमानस मौजूद रहे ।
पूजन कार्यक्रम संगठन के धर्म गुरु नवीन गुर्रानी द्वारा किया गया वही संचालन लक्ष्मण देवपा द्वारा किया गया।














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