Home उत्तराखंड अभिलाषा समिति कार्यालय पिथौरागढ़ में व्यापक विचार-मंथन
उत्तराखंडसमाज

अभिलाषा समिति कार्यालय पिथौरागढ़ में व्यापक विचार-मंथन

114

पिथौरागढ़
उत्तराखंड की जैव विविधता, वन संपदा और हिमालयी पर्यावरण को वनाग्नि के बढ़ते संकट से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से संचालित “वनाग्नि विहिन हिमालय अभियान” की वर्ष 2026–27 की कार्ययोजना को लेकर अभिलाषा समिति कार्यालय, पिथौरागढ़ में एक महत्वपूर्ण विचार-मंथन गोष्ठी का आयोजन किया गया।

गोष्ठी का नेतृत्व अभिलाषा समिति के निदेशक एवं अभियान के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. किशोर कुमार पंत ने किया।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. पंत ने कहा कि वनाग्नि केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि मानव जीवन, जैव विविधता और हिमालयी सभ्यता के अस्तित्व से जुड़ा गंभीर संकट है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सामूहिक चेतना और जन-सहभागिता नहीं विकसित की गई, तो इसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकते हैं।

डॉ. पंत ने अभियान की आगामी रणनीति प्रस्तुत करते हुए बताया कि उत्तराखंड के प्रत्येक जिले में स्कूलों के बच्चों को सहभागी बनाकर पेंटिंग प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता तथा जागरूकता गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा, ताकि बाल्यावस्था से ही पर्यावरण संरक्षण और वनाग्नि रोकथाम के प्रति संवेदनशीलता विकसित हो सके।

उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत राजकीय एवं प्रशासनिक कार्यालयों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से नुक्कड़ सभाओं तथा हस्ताक्षर अभियानों का संचालन किया जाएगा, जिससे वनाग्नि के विरुद्ध जन-आंदोलन का स्वरूप तैयार हो सके।

गोष्ठी में प्रस्तावित प्रमुख अभियानों में
“सेल्फी विद माई प्लांट”,
“मेरा जंगल – तेरी आत्मा”,
“एक सांस – एक पेड़”,
तथा “धरती मां ही स्वर्ग है : आत्मबोध” जैसे रचनात्मक, भावनात्मक एवं जन-जागरूकता आधारित कार्यक्रमों को सम्मिलित किया गया।

डॉ. पंत ने विशेष रूप से इस तथ्य पर जोर दिया कि हरे चारे के लोभ में जंगलों में आग लगाना प्रकृति और मानव—दोनों के लिए घातक है। उन्होंने सुझाव दिया कि लोग अपने घरों के आसपास चौड़ी पत्ती वाले चारा-पौधों का रोपण करें, जिससे वनाग्नि की घटनाओं में कमी आएगी और साथ ही शुद्ध वायु, जल स्रोतों के संरक्षण एवं पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मानव जीवन का मूल आधार जैव विविधता संरक्षण है—वनस्पतियां, पशु-पक्षी और सूक्ष्म जीव मिलकर पृथ्वी के जीवन चक्र को संतुलित रखते हैं। इनका संरक्षण ही सुरक्षित हिमालय और सतत विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

गोष्ठी में सरहद लाइव न्यूज चैनल के सीईओ विप्लव भट्ट, सीमांत डेवलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष प्रकाश गोस्वामी, सामाजिक कार्यकर्ता उमेश धामी, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सोसायटी की उपाध्यक्ष एवं परियोजना समन्वयक गीतांजलि बिष्ट, श्रीमती विजया नितवाल, तथा ऑनलाइन माध्यम से अभिलाषा समिति के कुमाऊं मंडल परियोजना समन्वयक हेम चन्द्र खोलिया, समिति की सलाहकार ज्योति ग्वासीकोटी, बसंत बल्लभ भट्ट सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहभागिता की और महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।

गोष्ठी में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी रक्षाबंधन पर्व पर पेड़ों को राखी बांधकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया जाएगा। साथ ही वन विभाग के सहयोग से वन प्रभाग के अभियानों के प्रचार-प्रसार में स्वयंसेवी के रूप में सक्रिय सहभागिता करने का सामूहिक संकल्प व्यक्त किया गया।
गोष्ठी के अंत में सर्वसम्मति से यह निष्कर्ष निकाला गया कि “वनाग्नि विहिन हिमालय अभियान” को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जन-संवेदनाओं से जुड़ा सतत सामाजिक आंदोलन बनाया जाएगा, ताकि हिमालय की हरियाली, जैव विविधता और जीवनदायिनी प्रकृति को सुरक्षित रखा जा सके।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

नाबालिग को बहला-फुसलाकर शोषण करने वाला आरोपी गिरफ्तार

पिथौरागढ़ थाना मुनस्यारी में एक व्यक्ति द्वारा सूचना दी गई कि उनकी...

पूर्व सैनिक संगठन द्वारा चलाया जा रहा धरना आज 61वें दिन भी जारी

उत्तराखंड – जनपद में पूर्व सैनिक संगठन द्वारा चलाया जा रहा धरना...

पिथौरागढ़ में अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण, नियमों के पालन के दिए निर्देश

पिथौरागढ़, 17 अप्रैल 2026 — मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एस एस नबियाल...