जनपद पिथौरागढ़ में 130 पर्यावरण बटालियन को बचाने के लिए पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज दसवें दिन भी पूरे जोश, अनुशासन और संकल्प के साथ जारी रहा।
आंदोलन को मिल रहा जनसमर्थन दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों और विभिन्न संगठनों की सहभागिता इस संघर्ष को जनांदोलन का रूप दे रही है।
धरने में वक्ताओं ने भावुक होकर कहा कि जिस उत्तराखंड राज्य को सैनिकों के त्याग, बलिदान और संघर्ष की विरासत के साथ बनाया गया, उसी प्रदेश में आज सैनिकों की भावनाओं की अनदेखी की जा रही है।
स्वर्गीय जनरल बी. सी. जोशी जैसे दूरदर्शी सैन्य नेतृत्व ने कुमाऊँ की भौगोलिक, पर्यावरणीय और सामरिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 130 पर्यावरण बटालियन को पिथौरागढ़ की धरती के लिए एक *उपहार के रूप में स्थापित कराया था।
यह केवल एक सैन्य इकाई नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्र के भविष्य, सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन की आधारशिला थी।
पूर्व सैनिकों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक षड्यंत्र के तहत इस बटालियन को जनपद से हटाया जा रहा है और जनप्रतिनिधि मौन दर्शक बने हुए हैं। प्रदेश के पाँचों सांसदों तथा सत्तासीन नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि कुर्सी और सत्ता की लालसा ने जनहित और सीमांत की संवेदनाओं को पीछे छोड़ दिया है। यह केवल एक बटालियन का मुद्दा नहीं, बल्कि पिथौरागढ़ के युवाओं, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का प्रश्न है।
धरने में उपस्थित पूर्व सैनिकों की आँखें उस समय नम हो गईं जब उन्होंने उन 300 से अधिक वीर शहीदों को याद किया, जिन्होंने इसी सीमांत जनपद से निकलकर देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा, “हमने अपने साथियों को ऑपरेशनों में खोया, उनके बलिदान को दिल में संजोए रखा। हमें विश्वास था कि यह देश और यह राज्य सैनिकों के सम्मान को सर्वोपरि रखेगा। लेकिन आज हमें अपमान का घूंट पीना पड़ रहा है। यह विडंबना है कि सैनिकों के नाम पर राजनीति करने वाले ही सैनिकों की पीड़ा को अनसुना कर रहे हैं।”
पूर्व सैनिक संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जनपद के भविष्य से यह 130 पर्यावरण बटालियन के तौर पर दिया गया जनरल बी जोशी साहब का *‘उपहार’* छीना गया, तो इसका लोकतांत्रिक जवाब वर्ष 2027 में अवश्य दिया जाएगा। यह संघर्ष किसी दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि सीमांत के अस्तित्व, सम्मान और स्वाभिमान के लिए है।
धरने को सीनियर सिटीजन संगठन के उपाध्यक्ष आर. एस. खनका जी तथा उत्तराखंड क्रांति दल के नेता चंद्रशेखर कापड़ी जी ने समर्थन दिया। पूर्व सैनिक राजेंद्र जोरा,हर सिंह,विक्रम चंद,देवराज सिंह,महेश चंद,केदार सिंह,महादेव गिरी,शिव दत्त,सुभाष भट्ट सहित दर्जनों पूर्व सैनिक मौजूद रहे।
अनेक वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है — जब तक 130 पर्यावरण बटालियन को पिथौरागढ़ में बनाए रखने का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, संघर्ष जारी रहेगा।
पूर्व सैनिकों ने अंत में एक स्वर में कहा —
*“यह सीमांत की अस्मिता की लड़ाई है। यह उन शहीद साथियों के सम्मान की लड़ाई है, जिनकी शहादत पर हमें गर्व है। यदि सैनिकों की आवाज अनसुनी की गई, तो इतिहास गवाह रहेगा कि पूर्व सैनिकों ने अपने जनपद और भविष्य को बचाने के लिए अंतिम दम तक संघर्ष किया।”














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