पिथौरागढ़।
130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन का अनिश्चितकालीन धरना आज 18वें दिन भी लगातार जारी रहा।
देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले पूर्व सैनिक आज अपने ही जनपद, अपने पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए धरने पर बैठे हैं।
धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों ने प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की कथनी और करनी पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनका कहना है कि जो सैनिक जीवन भर देश की सीमाओं की रक्षा करते रहे, आज वही सैनिक अपने जनपद के पर्यावरण, रोजगार, पलायन, सीमांत सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और हिमालय संरक्षण जैसे मूलभूत मुद्दों को लेकर सड़क पर बैठने को मजबूर हैं, लेकिन शासन-प्रशासन उनकी आवाज़ सुनने को तैयार नहीं है।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि यह केवल एक बटालियन का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे सीमांत जनपद के भविष्य का प्रश्न है। यदि 130 पर्यावरण बटालियन का विस्थापन होता है तो इसका सीधा प्रभाव जनपद के पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार, सीमांत सुरक्षा और पलायन जैसी गंभीर समस्याओं पर पड़ेगा।
धरने में उपस्थित सभी पूर्व सैनिकों ने जनपद के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी और उदासीनता की भी कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय जनता की चौखट पर आने वाले जनप्रतिनिधि आज जन सरोकारों से पूरी तरह दूरी बनाए हुए हैं। यह स्थिति जनपद के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जनप्रतिनिधि जनता की आवाज़ नहीं सुनते, तो 2027 में जनता उन्हें इसका करारा जवाब देगी। साथ ही चेतावनी दी गई कि जब तक इस निर्णय को वापस नहीं लिया जाता, *तब तक जनपद में आने वाले किसी भी नेता या राजनेता का लोकतांत्रिक विरोध किया जाएगा।*
शासन-प्रशासन की लगातार उपेक्षा से आहत पूर्व सैनिक अब बड़ी रणनीति की ओर बढ़ने को मजबूर हो रहे हैं। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से विरोध रैलियाँ निकालने और इस जनआंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने की योजना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत आगामी दिनों में की जाएगी।
पूर्व सैनिकों ने प्रशासन और सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि लगातार 18 दिन बीत जाने के बाद भी यदि कोई संवाद या समाधान का प्रयास नहीं किया जाता, तो यह अत्यंत निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह धरना तब तक जारी रहेगा जब तक जनपद और देशहित में इस निर्णय को वापस नहीं लिया जाता।
साथ ही पूर्व सैनिकों ने दो-टूक शब्दों में कहा कि यदि इस आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि या अप्रिय घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और सरकार की होगी, जिसकी पूर्व चेतावनी दी जा रही है।
आज के धरने को सीनियर सिटीजन संगठन के उपाध्यक्ष आर एस खनका, गिरधर सिंह बिष्टजी ,चंद्र शेखर महर जी, अध्यक्ष रामलीला कमेटी टकाना, सूबेदार मेजर शंकर सिंह, सूबेदार खुशाल सिंह ज्याला, सूबेदार मेजर गणेश दत्त पांडे, हवलदार दलीप सिंह भंडारी, नायक दीप चंद्र जोशी, सूबेदार नंदा सिंह बिष्ट,किशन सिंह सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
पूर्व सैनिकों ने अंत में कहा कि
*“यह लड़ाई केवल एक बटालियन की नहीं, बल्कि हिमालय, पर्यावरण और सीमांत जनपद के अस्तित्व की लड़ाई है — और इसे अंत तक लड़ा जाएगा।”*














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