पिथौरागढ़।
पूर्व सैनिक संगठन द्वारा 130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना आज 27वें दिन भी पूरे जोश और दृढ़ संकल्प के साथ जारी रहा। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों के साथ-साथ सीनियर सिटीजन संगठन के सदस्य भी पहुंचे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सरकार, शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की लगातार बनी हुई चुप्पी पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुखद और शर्मनाक स्थिति है कि सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर शासन, प्रशासन, विधानसभा और संसद—सभी जगह सन्नाटा दिखाई दे रहा है। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि जनप्रतिनिधि जनता की भावनाओं और क्षेत्र के हितों की अनदेखी करते रहेंगे तो वर्ष 2027 में जनता भी उन्हें जवाब देने का काम करेगी।
पूर्व सैनिक संगठन ने निर्णय लिया है कि जनपद के जनप्रतिनिधियों से इस विषय पर जवाब मांगा जाएगा। इसके तहत संगठन द्वारा शीघ्र ही एक विशेष कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिसमें पर्यावरण के प्रतीक स्वरूप पौधे भेंट कर जनप्रतिनिधियों से उनकी चुप्पी का कारण पूछा जाएगा। संगठन का कहना है कि अब जनता के सवालों का जवाब देने की बारी जनप्रतिनिधियों की है।
धरने में उपस्थित पूर्व सैनिकों ने एक स्वर में कहा कि 130 पर्यावरण बटालियन केवल एक सैन्य इकाई नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण और जनभावनाओं से जुड़ी पहचान है। इसका विस्थापन पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
संगठन ने यह भी घोषणा की कि आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए जल्द ही जन-जागरण एवं चेतना यात्राएं विभिन्न क्षेत्रों में निकाली जाएंगी, ताकि आम जनमानस को इस संवेदनशील विषय के प्रति जागरूक किया जा सके।
पूर्व सैनिक संगठन ने जनपद के सभी नागरिकों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण और सीमांत क्षेत्र के हितों से जुड़े इस आंदोलन में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें और जनपद के भविष्य की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाएं।
आज के धरने में सीनियर सिटीजन सोसायटी के सदस्य, पूर्व सैनिक संगठन के पदाधिकारी तथा दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया।














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