पिथौरागढ़। 130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 31वें दिन भी पूरे आक्रोश और दृढ़ संकल्प के साथ जारी रहा। आज बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों द्वारा प्रधानमंत्री को संबोधित पोस्टकार्ड प्रेषित किए गए तथा इस अभियान को और तेज करने का संकल्प लिया गया।
धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों ने सरकार की लगातार उपेक्षा पर तीखा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि एक ओर सरकार उत्तराखंड को “सैन्य भूमि” और “पांचवां धाम (सैन्य धाम)” बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर 31 दिनों से शांतिपूर्ण धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों की कोई सुध नहीं ली जा रही है। यह सरकार की कथनी और करनी के बीच स्पष्ट अंतर को दर्शाता है।
पूर्व सैनिकों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वर्तमान नीतियां शहीदों के सम्मान के बजाय उनकी उपेक्षा तथा पूर्व सैनिकों के दमन की दिशा में कार्य कर रही हैं। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र एवं व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
पूर्व सैनिकों ने दो टूक कहा कि जब तक 130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन का आदेश निरस्त नहीं किया जाता, तब तक यह धरना यथावत जारी रहेगा।
आगामी नवरात्रि के अवसर पर पूर्व सैनिकों द्वारा मां कालिका से प्रदेश और देश के नीति-निर्माताओं को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की जाएगी। साथ ही धरना स्थल पर *“सद्बुद्धि भजन”* का आयोजन भी किया जाएगा। संगठन ने एक विशाल चेतना रैली आयोजित करने की भी घोषणा की है, जिससे जनसमर्थन को और मजबूत किया जाएगा।
आज के धरने में टकाना रामलीला कमेटी के अध्यक्ष चंद्रशेखर महर, पूर्व सैनिक शिवदत्त कांडपाल,सुरेश पुनेरा सेना मेडल,गिरधर सिंह,प्रहलाद सिंह,राजेंद्र जोरा, बलवंत सिंह सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।














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