पिथौरागढ़ – 130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 37वें दिन भी पूरे जोश, जज़्बे और जनसमर्थन के साथ जारी रहा। दिन-प्रतिदिन बढ़ती भागीदारी इस आंदोलन को अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप देती जा रही है। 
आज बड़ी संख्या में लोगों ने धरनास्थल पर पहुंचकर अपना नैतिक समर्थन दिया, जिससे आंदोलन और अधिक सशक्त होकर उभर रहा है।
आज प्रातः धरने पर 3 कुमाऊं रेजीमेंट के पूर्व सैनिकों के साथ जनपद के विधायक मयूख महर ,छात्र संघ, ग्राम प्रधान संगठन बिण ब्लॉक तथा दर्जनों पूर्व सैनिकों ने एकजुट होकर धरने में सहभागिता की और जनपद की आवाज को बुलंद किया। लगातार मिल रहे सहयोग और समर्थन से यह संघर्ष अब जन-जन की आवाज बनता जा रहा है, जो गांव-गांव से उठती एक ज्वाला का रूप ले रहा है।
धरनास्थल से स्पष्ट संदेश दिया गया कि सरकार और शासन की चुप्पी अब ज्यादा दिन नहीं चलेगी। *“कुंभकरणी नींद”* में सोई व्यवस्था को जगाने के लिए आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। 
इसी क्रम में एक विशाल जनसमर्थित रैली के आयोजन की रूपरेखा भी तेजी से तैयार की जा रही है।
विधायक मयूख महर ने 37 दिनों से पूर्व सैनिकों की मांगों की अनदेखी पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल सैनिकों की नहीं, बल्कि पूरे जनपद के सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने इस आंदोलन को और अधिक व्यापक जनसमर्थन दिलाने का आश्वासन दिया।
छात्र संघ अध्यक्ष इंद्र बतियाल तथा कार्यकारिणी ने इसे युवाओं की लड़ाई बताते हुए हर युवा से आगे आकर इस आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया। वहीं ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष भरत राम जी तथा ग्राम प्रधानों ने हर गांव से लोगों को संगठित कर सड़कों पर उतरने और एक बड़ी जनक्रांति का हिस्सा बनने की बात कही।
3 कुमाऊं रेजीमेंट के सु मेजर गोविंद सिंह साहब ने भी इस संघर्ष को हर स्तर तक ले जाने और इसे निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने के लिए पूर्ण समर्थन और सहयोग का भरोसा दिलाया।
आज के धरने में नायब सूबेदार (सेवानिवृत्त) हयात सिंह, लक्ष्मण सिंह हर सिंह , भुवन पांडे, गिरीश भट्ट, महेश पांडे त्रिलोक सिंह, भूपाल सिंह,राजेंद्र भट्ट,जगत सिंह, किशन सिंह, शेर सिंह सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
*पूर्व सैनिक संगठन ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है और जब तक 130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक यह संघर्ष और अधिक तीव्र और व्यापक होता जाएगा।














Leave a comment