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पिथौरागढ़ 43वें दिन भी जारी रहा पूर्व सैनिकों का उग्र धरना,

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पिथौरागढ़ – पर्यावरण बटालियन की स्थापना एवं संरक्षण को लेकर पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 43वें दिन भी उसी जोश और दृढ़ता के साथ जारी रहा। पूर्व सैनिक अपने संकल्प पर अडिग हैं और आंदोलन को अब हर स्तर पर नई पहचान मिल रही है।
धरना स्थल से पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट कहा कि सरकार उनके धैर्य की परीक्षा ले रही है, लेकिन वे सरकार को “सोचने और झुकने” पर मजबूर कर देंगे। उन्होंने वर्तमान नेतृत्व को संवेदनहीन, कमजोर और दिशाहीन बताते हुए कहा कि अब यह देखना होगा कि इस संघर्ष में कौन पीछे हटता है—पूर्व सैनिक या सरकार।

पूर्व सैनिकों ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक बटालियन की नहीं, बल्कि जनपद पिथौरागढ़ के भविष्य, सीमांत क्षेत्र की सुरक्षा, रोजगार और पलायन जैसे गंभीर मुद्दों से जुड़ी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जनपद के हितों में सार्थक निर्णय लिया जाएगा या फिर “स्वयं को सबसे बड़ा सेवक” कहने वाली सरकार इस क्षेत्र की विरासत को केंद्र के हाथों सौंप देगी।

वक्ताओं ने कहा कि 130 पर्यावरण बटालियन, जो एक धरोहर के रूप में पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने का कार्य कर रही है, उसे यथावत रखा जाना चाहिए। यदि इसे भी बड़े शहरों या अन्य राज्यों (जैसे गुजरात) भेजने का प्रयास किया गया, तो यह सीमांत क्षेत्र के साथ अन्याय होगा।

पूर्व सैनिकों ने तीखे शब्दों में प्रदेश नेतृत्व पर हमला करते हुए कहा कि ऐसा “कमजोर और दिशाहीन नेतृत्व” ही इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि सीमांत क्षेत्र हमेशा उपेक्षा का शिकार रहा है, कभी बाहरी कब्जों और कभी प्रशासनिक उदासीनता के कारण।
उन्होंने यह भी कहा कि जहां एक ओर पड़ोसी देश नेपाल लिपुलेख जैसे क्षेत्रों पर अपना दावा मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यहां की सुरक्षा को कमजोर करते हुए पर्यावरण बटालियन जैसी महत्वपूर्ण इकाई को हटाने की कोशिश की जा रही है, जो अत्यंत चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।

पूर्व सैनिकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश का नेतृत्व हिमालय और सीमांत क्षेत्र की “बलि” देने पर आमादा है। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि जब पूर्व सैनिक लगातार अपने अधिकारों और क्षेत्र के अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब भी शासन-प्रशासन पूरी तरह मौन है।
संगठन ने दो टूक कहा कि पूर्व सैनिकों का धैर्य न टूटा है और न टूटेगा। अपनी जीत सुनिश्चित होने तक यह आंदोलन और अधिक उग्र एवं व्यापक रूप में जारी रहेगा।

आज के धरने में सीनियर सिटीजन राजेंद्र सिंह खनका, सूबेदार मेजर त्रिलोक सिंह पोखरिया, लक्ष्मण थापा, गोपाल धामी, धर्म सिंह, नारायण शर्मा, गिरधर सिंह तथा कैप्टन विक्रम सिंह (सेना मेडल) सहित अनेक पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।

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