Home उत्तराखंड फ्री शिक्षा के प्रलोभन में न आएं अभिभावकः निजी स्कूलों के बाजारीकरण पर एसोसिएशन की चेतावनी
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फ्री शिक्षा के प्रलोभन में न आएं अभिभावकः निजी स्कूलों के बाजारीकरण पर एसोसिएशन की चेतावनी

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पिथौरागढ़, सीमांत जनपद में “फ्री शिक्षा” के नाम पर अभिभावकों को भ्रमित किए जाने की बढ़ती शिकायतों को लेकर एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स कमेटी उत्तराखंड ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने स्पष्ट कहा है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या बाजारीकरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जिला अध्यक्ष पुरन चन्द्र भट्ट ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि कुछ स्कूल “फ्री शिक्षा” का प्रलोभन देकर अभिभावकों को आकर्षित करते हैं,

लेकिन बीच सत्र में स्कूल भवन बदलने, विभिन्न मदों में शुल्क वसूलने और अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्य न केवल अभिभावकों के साथ अन्याय हैं, बल्कि पूरे शैक्षणिक वातावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जिन संस्थानों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और जो अपने भवन स्वामियों को नियमित किराया देने में भी सक्षम नहीं हैं, वे अभिभावकों को “फ्री शिक्षा” देने का दावा कैसे कर रहे हैं और फ्री ड्रेस, फ्री स्कूल बैग तथा फ्री वाहन सेवा में धनराशि कहां से ला रहे हैं, सीमांत जनपद में यह जांच का विषय है, यदि वास्तव में सेवा भाव है और आयकर विभाग के मानकों में चंदा है तो हम उसका स्वागत करते हैं, अन्यथा यह स्थिति अभिभावकों के हितों के साथ खिलवाड़ है और शिक्षा को व्यवसाय में बदलने का प्रयास है।

इस अवसर पर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. किशोर कुमार पंत ने कहा कि एसोसिएशन का दायित्व केवल विद्यालयों के हितों की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि अभिभावकों के अधिकारों और विश्वास की रक्षा करना भी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते संबंधित स्कूल संचालकों ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो संगठन जनहित में प्रशासनिक सहयोग लेने के लिए बाध्य होगा।

कुमाऊं मंडल अध्यक्ष रुद्राक्ष जोशी ने भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जनपद पिथौरागढ़ में शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हुआ है, जिससे शिक्षण संस्थानों की छवि लगातार धूमिल हो रही है।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे किसी भी विद्यालय में प्रवेश से पहले उसके संसाधनों, भवन, मान्यता और कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा सेवा है, व्यवसाय नहीं। अभिभावकों से अपील की गई है कि वे “फ्री” के प्रलोभन में आने के बजाय अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए विवेकपूर्ण निर्णय लें।

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