पिथौरागढ़- पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 48वें दिन में प्रवेश कर गया लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से शासन-प्रशासन और सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल या संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई है।
एक ओर सरकार सम्मान यात्राओं और कार्यक्रमों की तैयारियों में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर अपने सम्मान और अधिकारों की मांग को लेकर शांतिपूर्वक बैठे पूर्व सैनिकों के प्रति यह उदासीनता सरकार के दोहरे रवैये को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।
धरने के दौरान पूर्व सैनिकों ने अपनी एकजुटता और मजबूती का परिचय देते हुए स्पष्ट कहा कि सरकार की यह चुप्पी और अनदेखी भविष्य में उसके लिए भारी पड़ सकती है। जो सरकार आज पूर्व सैनिको के लिए आवाज नहीं उठा पा रहे हैं, उनके विरोध में भी यही संगठन आगे बढ़कर मजबूती से खड़ा होगा।
संगठन द्वारा बताया गया कि विस्थापन के आदेश के विरोध में सभी पूर्व सैनिक संगठनों से निरंतर संपर्क किया जा रहा है और व्यापक स्तर पर समर्थन प्राप्त हो रहा है। जनपद में आम जनता का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है,
जिससे यह आंदोलन और अधिक सशक्त होता जा रहा है। संगठन का मानना है कि आने वाला समय इस आंदोलन के लिए निर्णायक साबित होगा।
पूर्व सैनिकों ने यह भी कहा कि मैदानी क्षेत्रों में जहां सरकार विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सैनिकों को जोड़ने का प्रयास कर रही है, वहीं संगठन अन्य क्षेत्रों के सैनिकों से संपर्क कर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार कर रहा है।
यदि सरकार अब भी अपनी हठधर्मिता पर कायम रहती है, तो पूर्व सैनिक आगामी समय में और सशक्त कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।
संगठन ने शासन-प्रशासन और सरकार से इस विषय पर शीघ्र, सार्थक और सम्मानजनक वार्ता की मांग की है।
आज के धरने में कैप्टन लक्ष्मण सिंह थापा, महेश जोशी, गिरीश जोशी, हर सिंह, सुन्दर सिंह, पुष्कर सिंह, प्रताप सिंह तथा सूबेदार कृष्णा सिंह नेगी सहित अनेक पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।














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