Home उत्तराखंड धरना 50वें दिन में प्रवेश — “सम्मान की लड़ाई अब निर्णायक संघर्ष की ओर”
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धरना 50वें दिन में प्रवेश — “सम्मान की लड़ाई अब निर्णायक संघर्ष की ओर”

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पिथौरागढ़। पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 50वें दिन में प्रवेश कर गया। आधी सदी के इस पड़ाव पर भी शासन-प्रशासन, प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की निरंतर चुप्पी ने पूर्व सैनिकों को गहरी निराशा और आक्रोश से भर दिया है।

पूर्व सैनिकों ने कहा कि जो सैनिक जीवनभर देशहित को सर्वोपरि मानते हुए अपने शौर्य और समर्पण से राष्ट्र की सेवा करते रहे, आज वही अपने सम्मान और अस्तित्व की रक्षा के लिए सड़कों पर बैठने को विवश हैं। 50 दिन बीत जाने के बावजूद जनप्रतिनिधियों और सरकारों की संवेदनहीनता इस जनपद की वर्तमान दिशा और दशा को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।

संगठन ने आरोप लगाया कि पिथौरागढ़ अब विकास और संवेदनशीलता का केंद्र न रहकर केवल राजनीतिक स्वार्थों का अखाड़ा बनता जा रहा है, जहां जनप्रतिनिधि आपसी समीकरणों में उलझकर सीमांत की संपदाओं और संभावनाओं को कमजोर करने में लगे हैं। पूर्व सैनिकों ने उदाहरण देते हुए कहा कि अतीत में बड़े औद्योगिक अवसर और संस्थान इस क्षेत्र से समाप्त होते गए, जिससे हजारों युवाओं के रोजगार छिन गए, लेकिन जनपद कभी एकजुट होकर इसके खिलाफ खड़ा नहीं हो सका।
पूर्व सैनिकों ने यह भी कहा कि आज यहां के युवाओं के सामने रोजगार के सीमित अवसर बचे हैं, जिसके कारण उन्हें मजबूरन अन्य जिलों या क्षेत्रों की ओर रुख करना पड़ रहा है। रक्षा सेवाओं में भी अवसरों का स्वरूप बदलने से स्थानीय युवाओं के लिए चुनौतियां और बढ़ गई हैं। वहीं, जिन संस्थानों से क्षेत्र को स्थायित्व और विकास मिल सकता था, वे भी धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं।

संगठन ने विशेष रूप से चेताया कि पर्यावरण बटालियन जैसी महत्वपूर्ण इकाई, जो इस सीमांत क्षेत्र के पर्यावरण और सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है, उसे भी समाप्ति की ओर धकेला जा रहा है। यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो इसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर गंभीर रूप से पड़ेगा।

पूर्व सैनिकों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों पर आरोप लगाया कि वे केवल आगामी राजनीतिक लक्ष्यों पर केंद्रित हैं, जबकि जमीनी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि यह स्थिति उस उदाहरण को चरितार्थ करती है, जहां व्यक्ति स्वयं जिस आधार पर खड़ा है, उसी को काटने में लगा है।

धरने में मौजूद पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष अब छोटा नहीं रह गया है, बल्कि यह अस्तित्व और भविष्य की लंबी लड़ाई है। आवश्यकता पड़ने पर इसे और व्यापक तथा निर्णायक रूप दिया जाएगा, लेकिन पूर्व सैनिक अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए पीछे नहीं हटेंगे।

आज के धरने में पर दयाल सिंह, गिरधर सिंह, उमेश फुलेरा, दीवान सिंह, श्याम विश्वकर्मा सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।

पूर्व सैनिक संगठन ने एक बार फिर शासन-प्रशासन और सरकार से इस विषय पर तुरंत हस्तक्षेप कर सार्थक समाधान निकालने की मांग की है।

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