पिथौरागढ़ में पर्यावरण बटालियन की स्थापना को लेकर पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 42वें दिन भी लगातार जारी रहा। पूर्व सैनिक अपने अधिकारों और क्षेत्र के भविष्य को लेकर दृढ़ संकल्प के साथ डटे हुए हैं। संगठन का कहना है कि उन्हें पीछे हटाने के सभी प्रयास विफल हो चुके हैं और अब यह आंदोलन प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि जनपद के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और केंद्र सरकार की नीतियों के चलते सीमांत क्षेत्र के संसाधनों को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश हो रही है। साथ ही यह भी कहा गया कि बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर दूरी बनाए हुए हैं, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि स्वर्गीय जनरल बी.सी. जोशी द्वारा क्षेत्र को दिया गया यह महत्वपूर्ण योगदान वापस लेने की कोशिश की जा रही है, जो न केवल सैनिकों बल्कि पूरे जनपद के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि आश्वासन तो दिए जाते हैं, राजधानी आने तक का नेता दिया जाता है लेकिन जब मिलने के लिए समय मांगा जाता है बात की जाती है तो संवाद और समाधान के लिए समय तक नहीं दिया जाता।
संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधि जनपद की समस्याओं को समझने और समाधान करने में असमर्थ हैं, तो वे यहां आने से परहेज करें। अन्यथा उनके आगमन पर पूर्व सैनिकों द्वारा काले झंडे दिखाकर विरोध किया जाएगा।
धरने को समर्थन देने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सैनिक रमेश चंद्र, रामलीला कमेटी अध्यक्ष चंद्रशेखर महर, मोहन चंद्र (असम राइफल्स) सहित सूबेदार मेजर हरी नंदन, प्रहलाद बोहरा, देवकी नंदन, कल्याण ज्याला, नारायण दत्त, देवाकर बोहरा और अन्य दर्जनों पूर्व सैनिक मौजूद रहे।














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