पिथौरागढ़
पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिकों का धरना 22वें दिन भी जारी, सामाजिक कार्यकर्ताओं व स्पेशल फोर्स के पूर्व सैनिकों ने दिया समर्थन
130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन द्वारा चलाया जा रहा धरना आज 22वें दिन भी पूरे जोश और जज्बे के साथ जारी रहा। लगातार जारी इस आंदोलन को आज भी विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों और पूर्व सैनिकों का नैतिक समर्थन प्राप्त हुआ।
आज धरना स्थल पर मुनस्यारी क्षेत्र से आई सामाजिक कार्यकर्ता हीरा देवी ने उपस्थित होकर आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया।
उन्होंने कहा कि सीमांत जनपद के हितों और भविष्य से जुड़े इस मुद्दे को अनदेखा करना पूरे क्षेत्र के साथ अन्याय होगा। यदि इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो यह केवल पूर्व सैनिकों का ही नहीं बल्कि पूरे जनपद के सम्मान का प्रश्न बन जाएगा।
इसी क्रम में 3 पैरा स्पेशल फोर्स के पूर्व सैनिकों ने भी मेजर त्रिलोक सिंह (अ.प्रा.) के नेतृत्व में धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल एक बटालियन का नहीं बल्कि सीमांत क्षेत्र के भविष्य, सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई है।
सैनिकों ने स्पष्ट कहा कि यदि जल्द ही इस विषय पर कोई ठोस और सार्थक निर्णय नहीं लिया गया तो पूर्व सैनिक और जनमानस के साथ मिलकर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
धरने पर वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि अब समय आ चुका है कि इस संघर्ष को निर्णायक रूप देने की दिशा में गंभीरता से विचार किया जाए। वर्तमान समय में केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर बजट सत्र चल रहे हैं।
ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि सीमांत जनपद के जनप्रतिनिधि इस ज्वलंत मुद्दे को संसद और विधानसभा में कितनी मजबूती से उठाते हैं और इसके समाधान के लिए क्या प्रयास करते हैं।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि अब केवल आश्वासनों का समय नहीं बल्कि ठोस परिणाम सामने आने का समय है। यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि जिन जनप्रतिनिधियों को जनता ने अपने मुद्दों को उठाने के लिए संसद और विधानसभा में भेजा है, वे सीमांत क्षेत्र के भविष्य, रोजगार, पलायन, सुरक्षा और पूर्व सैनिकों के सम्मान जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लेकर कितने गंभीर हैं।
लगातार 22 दिनों से शांतिपूर्ण धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों के प्रति अभी तक केंद्र सरकार, राज्य सरकार तथा प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल न होने से पूर्व सैनिकों में गहरा आक्रोश भी देखने को मिला।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस विस्थापन के निर्णय को निरस्त नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा और इसके लिए समस्त जनमानस से सहयोग की अपेक्षा की जाएगी।
पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट किया कि जब तक 130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के निर्णय को निरस्त नहीं किया जाता, तब तक यह आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।
आज धरने पर श्रीमती दीपा जोशी,गोविन्द भंडारी, नारयण सिंह कृष्णा सिंह नेगी,ललित सिंह रावत, श्याम विश्वकर्मा सहित राम लीला कमेटी के अध्यक्ष चंद्र शेखर महर आदि शामिल रहे
जय हिंद














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