पिथौरागढ़
पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 40वें दिन भी पूरे जोश और आक्रोश के साथ जारी रहा।
लेकिन अब यह आंदोलन केवल धरना स्थल तक सीमित नहीं रहा — आज पूर्व सैनिकों ने एक विशाल और ऐतिहासिक बाइक रैली निकालकर इस संघर्ष को सड़कों पर उतार दिया।
धरना स्थल से शुरू हुई यह रैली पूरे नगर क्षेत्र में गूंजती हुई भरकटिया स्थित सैनिक छावनी पहुंची, जहां से पूर्व सैनिकों ने पैदल मार्च करते हुए अपनी ताकत और एकजुटता का प्रदर्शन किया।
इसके पश्चात राज्यपाल महोदय को ज्ञापन सौंपते हुए इस गंभीर विषय पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।
आज आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल महोदय ने अपने संबोधन में जनरल बी. जोशी द्वारा स्थापित बी सी जोशी एपीएस स्कूल का उल्लेख तो किया, लेकिन उसी महान सैन्य विरासत की प्रतीक पर्यावरण बटालियन पर पूर्ण मौन साध लिया।
यह बात पूर्व सैनिकों को गहराई से आहत करने वाली रही। वही प्रदेश के राज्यपाल सैन्य पृष्ठभूमि के, मुख्यमंत्री पूर्व सैनिक के पुत्र का उल्लेख भी महामहिम द्वारा किया गया जिस पर
पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि —
“40 दिनों से हम पूर्व सैनिक सड़कों पर बैठे हैं,
लेकिन हमारी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। यह केवल अनदेखी नहीं, बल्कि हमारे आत्मसम्मान का अपमान है।”
हालांकि राज्यपाल महोदय ने संगठन को राजभवन देहरादून आने का आमंत्रण दिया है, जिस पर संगठन द्वारा एक प्रतिनिधिमंडल भेजने पर विचार किया जा रहा है।
लेकिन अब पूर्व सैनिकों का आक्रोश चरम पर है। संगठन ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि —
👉 यदि एक सप्ताह के भीतर इस आंदोलन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो जनपद में आने वाले किसी भी जनप्रतिनिधि या अतिथि का काले झंडों से विरोध किया जाएगा।
संगठन ने यह भी साफ कर दिया है कि यह आंदोलन अब केवल एक बटालियन का मुद्दा नहीं रहा —
यह जनपद की अस्मिता, विरासत और युवाओं के भविष्य की निर्णायक लड़ाई बन चुका है।
पूर्व सैनिकों ने पूरे जनपदवासियों से आह्वान किया है कि वे इस संघर्ष में बढ़-चढ़कर भाग लें, क्योंकि यह लड़ाई हर नागरिक के सम्मान और अस्तित्व से जुड़ी है।
आज के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन, बाइक रैली और ज्ञापन कार्यक्रम में संगठन के उपाध्यक्ष रमेश सिंह,धर्म सिंह हर सिंह किशन सिंह आनंद सिंह हरीश पंत, दिवाकर सिंह गिरधर सिंह, गिरीश जोशी,श्याम विश्वकर्मा,सहित दर्जनों पूर्व सैनिकों ने भाग लिया।
*“अब यह संघर्ष रुकेगा नहीं — निर्णायक जीत तक जारी रहेगा!”














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