पिथौरागढ़। पर्यावरणीय विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 52वें दिन भी विपरीत मौसम के बावजूद पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। लगातार जारी इस आंदोलन ने अब और अधिक गंभीर रूप ले लिया है, वहीं पूर्व सैनिकों में सरकार और प्रशासन के प्रति आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है।
धरना स्थल पर पूर्व सैनिकों ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक ओर कुमाऊं क्षेत्र में “सम्मान यात्राएं” आयोजित की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर जनपद के पूर्व सैनिक अपने सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए 52 दिनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन उनकी आवाज सुनने को कोई तैयार नहीं है।
वहीं बीते दिवस पूर्व सैनिक संगठन द्वारा *जिलाधिकारी को एक ज्ञापन* सौंपते हुए जनपद में स्थापित सैनिक परिषद के पुनर्गठन की मांग प्रमुखता से उठाई गई। संगठन ने सैनिक परिषद की निष्क्रियता पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि परिषद अपनी मूल जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में पूर्णतः विफल रही है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि सैनिक परिषद का दायित्व पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों की समस्याओं को संबंधित स्तर तक पहुंचाना, उनके सम्मान, शौर्य और सुविधाओं के लिए कार्य करना तथा प्रत्येक तीन माह में प्रशासनिक एवं सैन्य अधिकारियों के साथ त्रैमासिक बैठक आयोजित करना है। लेकिन विगत पाँच महीनों से ऐसी कोई भी बैठक आयोजित नहीं की गई, जो परिषद की निष्क्रियता को उजागर करता है।
पूर्व सैनिकों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले दो महीनों से जारी इस धरने के बावजूद सैनिक परिषद का कोई भी सदस्य धरना स्थल पर नहीं पहुंचा और न ही किसी स्तर पर कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
इसके अतिरिक्त संगठन ने सैनिक परिषद के एक पदाधिकारी (उपाध्यक्ष) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर इस आंदोलन को “नौटंकी”, “मूर्खता” और “मनोरोग” जैसे आपत्तिजनक शब्दों से संबोधित किया, जिससे समस्त पूर्व सैनिक समुदाय के सम्मान को ठेस पहुंची है।
पूर्व सैनिकों ने ऐसे अधिकारी को तत्काल परिषद से हटाने की मांग करते हुए जिलाधिकारी से सख्त कार्रवाई की अपील की।
पूर्व सैनिक संगठन ने स्पष्ट किया कि ऐसी मानसिकता और आचरण का पुरजोर विरोध किया जाएगा और संगठन की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाले किसी भी व्यक्ति को उचित जवाब दिया जाएगा। इस पर जिलाधिकारी महोदय द्वारा आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
आज के धरने में चंद्रशेखर महर, आनंद सिंह, राजेंद्र जोरा, शेर सिंह,सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।














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