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130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में आंदोलन आठवें दिन भी जारी

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उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद भर में पूर्व सैनिक संगठन का जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है

130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में आंदोलन आठवें दिन भी जारी देवलथल तथा हल्द्वानी से भी धरने को समर्थन करते हुए जताया गया आक्रोश*


पर्यावरण बचाओ – सीमांत बचाओ संघर्ष के तहत पूर्व सैनिकों का अनिश्चितकालीन धरना आज आठवें दिन भी पूरे जोश और दृढ़ संकल्प के साथ जारी रहा।
जनपद पिथौरागढ़ में 130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन द्वारा चलाया जा रहा आंदोलन अब व्यापक जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। आज देवलथल क्षेत्र में भी सूबेदार मेजर शंकर सिंह एवं किशन सिंह साहब के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन कर सरकार से इस आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की।

धरना स्थल पर वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि शासन-प्रशासन और सरकार की चुप्पी इस आंदोलन को और उग्र बनाने का कार्य कर रही है। जिस प्रकार जनता की भावनाओं की अनदेखी की जा रही है, वह आग में घी डालने जैसा है। यदि समय रहते निर्णय वापस नहीं लिया गया तो यह आंदोलन जनपद स्तर से प्रदेशव्यापी स्वरूप लेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

पूर्व सैनिकों ने कहा कि जब पूरा जनपद पिथौरागढ़ अपने स्थापना दिवस को गर्व से मनाने की तैयारी कर रहा है, ऐसे समय में जनपद के अस्तित्व, रोजगार और भविष्य पर कुठाराघात करने वाला निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। सीमांत क्षेत्र पहले ही संसाधनों की कमी, बेरोजगारी और पलायन की मार झेल रहा है। ऐसे में 130 पर्यावरण बटालियन जैसी महत्वपूर्ण संस्था का विस्थापन न केवल आर्थिक चोट है, बल्कि सुरक्षा और पर्यावरणीय दृष्टि से भी घातक सिद्ध होगा।

संगठन द्वारा चलाए जा रहे जनसंपर्क अभियान को व्यापक समर्थन मिल रहा है। देवलथल क्षेत्र के प्रदर्शन के साथ ही हल्द्वानी के पूर्व सैनिकों ने भी कैप्टन एन डी पांडे साहब के नेतृत्व में इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। यह स्पष्ट संकेत है कि आंदोलन अब जनपद की सीमाओं से निकलकर पूरे प्रदेश में फैलने जा रहा है।

संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो डीडीहाट, देवलथल, धारचूला, मदकोट, मुनस्यारी, पाखू और बेरीनाग सहित समस्त क्षेत्रों में व्यापक रैलियां और चरणबद्ध आंदोलन प्रारंभ किए जाएंगे।
यह केवल एक बटालियन का प्रश्न नहीं, बल्कि सीमांत के अस्तित्व, रोजगार, पर्यावरण और भविष्य की लड़ाई है।
पूर्व सैनिक संगठन ने आम जनमानस, सामाजिक संगठनों एवं युवा शक्ति से अपील की है कि वे इस जनहित के संघर्ष में आगे आएं।
यदि जनभावनाओं की अनदेखी जारी रही तो आने वाले दिनों में आंदोलन निर्णायक और व्यापक रूप धारण करेगा।

“पर्यावरण बचाओ – सीमांत बचाओ”
“130 पर्यावरण बटालियन का विस्थापन रोको”

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