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130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिकों का धरना 23वें दिन भी जारी, अब जनप्रतिनिधियों की परीक्षा का समय

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पिथौरागढ़

जनपद पिथौरागढ़ में 130 पर्यावरण बटालियन के संभावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन के नेतृत्व में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना आज 23वें दिन भी पूरे जोश और दृढ़ संकल्प के साथ जारी रहा। दिन-प्रतिदिन यह आंदोलन व्यापक जनसमर्थन प्राप्त करते हुए एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
धरना स्थल से पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब यह संघर्ष केवल एक बटालियन का नहीं बल्कि सीमांत की अस्मिता, युवाओं के भविष्य और क्षेत्र के अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है।

संगठन ने उम्मीद जताई कि वर्तमान में चल रहे संसदीय सत्र और विधानसभा सत्र के दौरान इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को हमारे प्रतिनिधि मजबूती से उठा सार्थक निर्णय के साथ लौटेंगे।

पूर्व सैनिक संगठन ने कहा कि पिथौरागढ़, डीडीहाट और धारचूला के माननीय विधायक विधानसभा में तथा माननीय सांसद अजय टम्टा जी संसद में इस ज्वलंत मुद्दे को पूरी मजबूती के साथ उठाकर सीमांत की पीड़ा को देश और प्रदेश के सामने रखेंगे।

संगठन ने स्पष्ट चेतावनी भी दी कि अब समय आ गया है जब जनता अपने जनप्रतिनिधियों की भूमिका को ध्यान से देखेगी। यदि हमारे प्रतिनिधि इस गंभीर विषय पर ठोस और सकारात्मक परिणाम लेकर आते हैं तो पूर्व सैनिक संगठन उनका खुले दिल से स्वागत करेगा। लेकिन यदि इन ज्वलंत मुद्दों पर केवल गोलमोल बयान और औपचारिकता देखने को मिली, तो समाज ऐसे जनप्रतिनिधियों के बहिष्कार का भी निर्णय लेने से पीछे नहीं हटेगा।

धरने को समर्थन देने के लिए आज विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी धरना स्थल पर पहुंचे। भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ऋषेंद्र सिंह महर अपनी धर्मपत्नी एवं सामाजिक कार्यकर्ता मोनिका महार के साथ उपस्थित रहे। इसके साथ ही सीनियर सिटीजन संगठन के उपाध्यक्ष आर.एस. खनका, सामाजिक कार्यकर्ता दीपा जोशी,तथा आम आदमी पार्टी से गोविंद सिंह ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को पूर्ण समर्थन दिया।

सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सीमांत क्षेत्र के अस्तित्व से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार को तत्काल संज्ञान लेते हुए सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ऋषेंद्र महर ने भी इस मुद्दे को केंद्र स्तर तक मजबूती से उठाने का आश्वासन दिया।

पूर्व सैनिकों ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में इस विषय पर सकारात्मक और निर्णायक फैसला अवश्य आएगा, जो न केवल सीमांत की इस महत्वपूर्ण धरोहर को सुरक्षित रखेगा बल्कि क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार, पलायन रोकने और सीमांत की मजबूती के लिए भी एक मजबूत कदम साबित होगा।

धरना स्थल पर उपस्थित पूर्व सैनिकों में भगवान सिंह, गणेश पांडे, पूरन चंद्र, रामदत्त पाठक, हर सिंह, त्रिलोक सिंह, घनश्याम जोशी सहित दर्जनों पूर्व सैनिक मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में कहा कि जब तक इस विषय पर स्पष्ट और सकारात्मक निर्णय नहीं होता, तब तक यह संघर्ष इसी दृढ़ता के साथ जारी रहेगा।
*“सीमांत की अस्मिता से समझौता नहीं — संघर्ष जारी रहेगा।”

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