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130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिकों का धरना 11वें दिन भी जारी

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पिथौरागढ़ में 130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिकों का धरना 11वें दिन भी जारी

130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 11वें दिन भी निरंतर जारी रहा। आंदोलन को नई दिशा देते हुए संगठन के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी महोदय को पर्यावरण के स्वरूप पौधा भेंट कर प्रशासन से पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के प्रति संवेदनशील रुख अपनाने और शीघ्र ठोस कार्रवाई करने की मांग की। इस दौरान जिलाधिकारी द्वारा ज्ञापन प्राप्त कर उसे केंद्र सरकार को प्रेषित करने की बात कही गई।

धरने को पूर्व सैनिक संगठन धारचूला द्वारा भी स्थल पर उपस्थित रहकर नैतिक समर्थन प्रदान किया गया। धारचूला संगठन के अध्यक्ष कैप्टन भूपाल सिंह साहब द्वारा कहा कि शासन-प्रशासन और सरकार पूर्व सैनिकों के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। 11 दिनों के बाद भी कोई स्पष्ट निर्णय या आधिकारिक सूचना न मिलना सरकार के सैनिकों के प्रति वास्तविक दृष्टिकोण को उजागर करता है। उनकी कथनी और करनी में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है।

वही पुर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ के सचिव कैप्टन दयाल सिंह द्वारा चेतावनी दी कि पर्यावरण के प्रतीक स्वरूप पौधे आगामी दिनों में सभी जनप्रतिनिधियों को भेंट किए जाएंगे और इस संवेदनशील विषय पर उनके रवैये के विरोध में उनका घेराव भी किया जाएगा। साथ ही इस मुद्दे पर सार्थक और त्वरित कार्रवाई की मांग को और मुखर किया जाएगा।

संगठन द्वारा कहा कि संगठन को व्यापक नैतिक समर्थन मिल रहा है और आवश्यकता पड़ने पर प्रत्येक ब्लॉक और तहसील स्तर से रैलियां निकालकर आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। सरकार के रवैये के प्रति पूर्व सैनिकों का आक्रोश दिन-प्रतिदिन उग्र होता जा रहा है और अब सड़कों पर उतरने की रणनीति तैयार की जा रही है।

वक्ताओं ने जनमानस से भी अपील की कि इस संवेदनशील विषय पर सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने स्मरण कराया कि यह वही धरोहर है, जिसे स्वर्गीय जनरल बी.सी. जोशी की दूरदर्शी सोच के साथ इस सीमांत क्षेत्र को प्रदान किया गया था, ताकि सीमाएं सुरक्षित रहें, अंतिम गांव तक बसे लोग सुरक्षित रहें और सबसे बढ़कर हिमालय सुरक्षित रहे। यदि हिमालय सुरक्षित नहीं रहेगा तो देश की जल-सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन भी संकट में पड़ जाएगा।
संगठन ने आरोप लगाया कि जिस प्रकार पहले क्षेत्र से मैग्नेसाइट फैक्ट्री बंद हुई, अन्य संस्थान समाप्त होते गए, जनपद में भर्ती तक नहीं हो पा रही युवाओं को बनबसा रानीखेत के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं,और रोजगार के अवसर घटते गए, डीआरडीओ जहां पर पशुधन कृषि तथा अन्य उपक्रमों से जनपद के कई लोग लाभ प्राप्त करते थे वह धीरे-धीरेखत्म हो गया।उसी क्रम में यदि यह बटालियन भी हटाई गई तो सीमांत क्षेत्र का भविष्य और अधिक अंधकारमय हो जाएगा। न रोजगार बचेगा, न उद्यम और न ही पर्यावरण। इसके उत्तरदायी हम सभी होंगे।

पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट कहा कि यदि आज हम आवाज नहीं उठाएंगे तो आने वाली पीढ़ियां हमें धिक्कारेंगी कि हम अपने जनपद की धरोहर को बचा नहीं पाए। यह प्रत्येक जनपदवासी के आत्मसम्मान से जुड़ा प्रश्न है।

आज के धरने में सेना मेडल से सम्मानित सुरेश पुनेरा,लक्ष्मी दत्त जोशी,मदन सिंह,भूपेंद्र सिंह,रघुवर दत्त सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।

पूर्व सैनिक संगठन ने पुनः आह्वान किया कि यह लड़ाई केवल एक बटालियन की नहीं, बल्कि सीमांत के अस्तित्व, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है।

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