पिथौरागढ़ – 130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ का अनिश्चितकालीन धरना आज 16वें दिन भी पूरे जोश और दृढ़ संकल्प के साथ जारी रहा। 
होली जैसे पावन पर्व के अवसर पर भी पूर्व सैनिक अपने जनपद के भविष्य की रक्षा के लिए धरनास्थल पर डटे हुए हैं।
पूर्व सैनिकों ने दो टूक कहा —
अब तक हमने केवल एडवांस किया है, अटैक बाकी है!”
पूर्व सैनिकों ने तीखा प्रश्न उठाया कि जो सरकार त्योहार सैनिकों के साथ मनाने की बात करते हैं,
वे आज 16 दिनों से शांतिपूर्ण धरने पर बैठे सैनिकों की आवाज़ पर मौन क्यों हैं? 
उन्होंने कहा कि अब तक संगठन ने केवल “एडवांस” की कार्रवाई की है, 
किंतु यदि शासन-प्रशासन की उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी इसी प्रकार बनी रही तो यह आंदोलन निर्णायक और आर-पार की लड़ाई बन अटैक का रूप ले सकता है।
धरने पर उपस्थित वक्ताओं ने अपने सैन्य सेवा अनुभव साझा करते हुए कहा कि सैनिक लड़ाई नहीं चाहता, परंतु यदि जनपद के अस्तित्व पर संकट आए तो वह पीछे भी नहीं हटता।
संगठन ने स्पष्ट किया कि वे सरकार से शांति वार्ता चाहते हैं, ताकि यह संघर्ष उग्र रूप लेने से पहले ही समाधान की दिशा में बढ़ सके।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि यह किसी एक संगठन या वर्ग की लड़ाई नहीं, बल्कि सीमांत जनपद के भविष्य, रोजगार और पर्यावरण की रक्षा की लड़ाई है।
उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों—विधायक, मुख्यमंत्री और सैनिक कल्याण मंत्री—से संवेदनशील हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि जनता स्वयं इस चेतावनी को लिख रही है। यदि आज भी चेतना नहीं जागी तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम होंगे।
संगठन ने यह भी घोषणा की कि होली पर्व इस बार नहीं मनाएंगे। पूर्व सैनिकों का कहना है—
“हमारी होली उस दिन होगी, जिस दिन 130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन का संकट इस जनपद से समाप्त होगा।”
धरने को दिन-प्रतिदिन व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।
गांव-गांव जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है और शीघ्र ही एक विशाल महारैली आयोजित करने की तैयारी की जा रही है, जिसमें आम जनमानस की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
आज धरने पर उपस्थित सूबेदार मेजर भूपेंद्र सिंह रावल,हवलदार दलीप सिंह भंडारी,सूबेदार विजेंद्र सिंह,नायब सूबेदार केदार सिंह मेहता,नायब सूबेदार जश राम,नायब सूबेदार शिव दत्त कांडपाल,हवलदार इंद्रजीत सिंह बिष्ट,नायब सूबेदार देव राज सिंह दिगारी,सूबेदार सुरेंद्र सिंह,सूबेदार गोपाल सिंह,कैप्टन विक्रम सिंह बिष्ट तथा सैकड़ों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
पूर्व सैनिक संगठन ने समस्त जनपदवासियों से आह्वान किया है कि जिस प्रकार उत्तराखंड राज्य आंदोलन ने इतिहास रचा था, उसी प्रकार अब सीमांत जनपद के अस्तित्व और सम्मान की रक्षा हेतु एकजुट होकर आगे आने का समय है।
*“जनपद बचेगा, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा।”*
जय हिंद














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