130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिकों का धरना 25वें दिन भी जारी — जनाक्रोश बढ़ा, आंदोलन को जनआंदोलन बनाने की चेतावनी
जनपद पिथौरागढ़ में 130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन के नेतृत्व में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना आज 25वें दिन भी पूरे जोश, संकल्प और बढ़ते जनाक्रोश के साथ जारी रहा। दिन प्रतिदिन यह आंदोलन और अधिक व्यापक होता जा रहा है तथा अब यह केवल सैनिकों का आंदोलन न रहकर पूरे सीमांत जनपद की अस्मिता, पर्यावरण और भविष्य की लड़ाई बन चुका है।
धरना स्थल से पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट कहा कि सरकार और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की लगातार उपेक्षा और असंवेदनशीलता के कारण अब जनभावनाएं उबाल पर हैं। यदि शीघ्र ही 130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन का आदेश निरस्त नहीं किया गया तो इस आंदोलन को पूरे जनपद में व्यापक जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों से विशाल विरोध रैलियां निकाली जाएंगी और जनचेतना अभियान चलाया जाएगा ताकि सरकार को इस सीमांत जनपद की आवाज सुननी ही पड़े।
पूर्व सैनिकों ने विधानसभा सत्र के दौरान जनपद के पिथौरागढ़ , डीडीहाट धारचूला के तीनों विधायकों की भूमिका पर भी तीखा आक्रोश व्यक्त किया। सैनिकों ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़े विषय को विधानसभा पटल पर न उठाना जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता और क्षेत्र के भविष्य के प्रति उनकी उदासीनता को दर्शाता है। यह व्यवहार उस जनादेश का अपमान है जो जनता ने उन्हें अपने अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए दिया था।
धरना स्थल से सांसद महोदय की भूमिका पर भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई। पूर्व सैनिकों ने कहा कि उनसे स्पष्ट रूप से सरकार से विस्थापन आदेश निरस्त कराने का आग्रह किया गया था, लेकिन इसके विपरीत पूरे मुद्दे को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया और सांसद महोदय द्वारा पत्र के माध्यम से सरकार से यह प्रश्न उठाया गया कि पूर्व सैनिक रोजगार कर पाएंगे या नहीं। सैनिकों ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जब जनप्रतिनिधि ही मुद्दे की गंभीरता को समझने के बजाय उसे भटकाने का प्रयास करें, तो क्षेत्र के भविष्य को लेकर चिंता और गहरी हो जाती है।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत स्वार्थ का नहीं बल्कि पूरे सीमांत जनपद के अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। धरना स्थल पर 80 वर्ष से अधिक आयु के पूर्व सैनिक भी मौजूद हैं, जिन्होंने अपने जीवन के 30–32 वर्ष देश सेवा में समर्पित किए हैं। आज वही सैनिक अपने निजी हितों के लिए नहीं बल्कि इस क्षेत्र के पर्यावरण, रोजगार और भविष्य को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सैनिकों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि सरकार और जनप्रतिनिधियों की यही उदासीनता बनी रही तो वर्ष 2027 में जनता ऐसे निरंकुश और असंवेदनशील नेतृत्व को लोकतांत्रिक तरीके से करारा जवाब देगी। इसके लिए पूर्व सैनिक संगठन जनपद भर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इस मुद्दे से जोड़ेगा।
आज धरना स्थल पर जनसमर्थन और भी अधिक मजबूत होकर सामने आया। जनपद के सभी पार्षदों ने धरना स्थल पर पहुंचकर इस संघर्ष को अपना नैतिक समर्थन दिया और आश्वस्त किया कि अपने-अपने क्षेत्रों से विरोध रैलियां निकालकर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पूर्व सैनिकों ने कहा कि अब यह आंदोलन एक सशक्त जनचेतना बन चुका है, जो आने वाले समय में और भी अधिक व्यापक और प्रखर रूप में सामने आएगा।
*इसी के तहत कल ऐचोली क्षेत्र से पार्षद के तत्वाधान में एक वृहद जनाक्रोश रैली को निकालकर सरकार को जगाने का कार्य किया जाएगा साथ ही ज्ञापन भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिस पर अधिक से अधिक लोगों से इस रैली में प्रतिभा करने हेतु संगठन द्वारा भी आग्रह किया गया है।*
आज के धरने को सीनियर सिटीजन संगठन, पतंजलि योगपीठ तथा जनपद के सभी पार्षदों का समर्थन प्राप्त हुआ। धरना स्थल पर दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे और सभी ने एक स्वर में इस संघर्ष को अंतिम परिणाम तक जारी रखने का संकल्प दोहराया।
*“130 पर्यावरण बटालियन को बचाना — सीमांत के भविष्य को बचाना है।














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