पिथौरागढ़।
130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन द्वारा चलाया जा रहा धरना आज 29वें दिन भी पूरे जोश, उत्साह और संकल्प के साथ जारी रहा। सीमांत जनपद के पूर्व सैनिक इस आंदोलन को अपने सम्मान, क्षेत्र की सुरक्षा और हिमालयी पर्यावरण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
धरने की शुरुआत आज प्रातः बंगापानी क्षेत्र में सड़क मार्ग पर हुई दुखद दुर्घटना में दिवंगत कार्यरत सैनिक एवं दो अन्य युवाओं को 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की गई। उपस्थित सभी लोगों ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की तथा दुर्घटना में घायल युवक के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
धरना स्थल पर आज स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा पहुंचकर आंदोलन को नैतिक समर्थन प्रदान किया गया, जिससे पूर्व सैनिकों का मनोबल और अधिक मजबूत हुआ। हालांकि आंदोलन को लगभग एक महीना बीतने के बाद भी शासन-प्रशासन या जनप्रतिनिधियों द्वारा कोई ठोस पहल नहीं किए जाने से पूर्व सैनिकों में गहरा आक्रोश और निराशा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
पूर्व सैनिकों ने साफ शब्दों में कहा कि यह आंदोलन केवल एक बटालियन के विस्थापन का नहीं, बल्कि सैनिकों के सम्मान, सीमांत क्षेत्र की सुरक्षा और हिमालयी पर्यावरण की रक्षा से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनप्रतिनिधि आज सैनिकों के सम्मान और क्षेत्रीय हितों को भूल रहे हैं, तो 2027 के चुनाव में पूर्व सैनिक और क्षेत्र की जनता इसका लोकतांत्रिक जवाब देने से पीछे नहीं हटेगी।
पूर्व सैनिकों ने यह भी कहा कि सीमांत जनपद में तीन-तीन विधायक होने के बावजूद क्षेत्र नेतृत्व विहीन दिखाई दे रहा है, जबकि लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद की कार्यशैली पर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। विशेष रूप से पूर्व सैनिकों के इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनकी गोल मोल कार्यवाही से सैनिक समुदाय में गहरा रोष व्याप्त है।
आज धरने पर इंस्पेक्टर केशर सिंह डिगारी, मोहन सिंह खोलीया (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी), सूबेदार मेजर घनश्याम जोशी, उमेश फुलेरा, श्याम विश्वकर्मा, धर्म सिंह रसोनी, आनंद सिंह, बलवंत सिंह, किशन सिंह सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे और आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
*पूर्व सैनिकों ने एक स्वर में कहा कि 130 पर्यावरण बटालियन का विस्थापन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा, और जब तक सरकार इस निर्णय को वापस नहीं लेती, तब तक यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेता जाएगा।














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