पिथौरागढ़- पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 56वें दिन में प्रवेश कर गया, और इसके साथ ही पूर्व सैनिकों का आक्रोश भी खुलकर सामने आने लगा है।
लगातार 56 दिनों से अपने सम्मान, अधिकार और सीमांत के भविष्य के लिए शांतिपूर्वक संघर्ष कर रहे पूर्व सैनिकों की अनदेखी अब जनपद के राजनीतिक नेतृत्व और सरकार की संवेदनहीनता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है।
धरना स्थल पर पूर्व सैनिकों ने तीखे शब्दों में कहा कि एक ओर “सम्मान यात्राएं” निकाली जा रही हैं,
बड़े-बड़े मंचों से सैनिकों और पूर्व सैनिकों के सम्मान की बातें की जा रही हैं, रक्षा मंत्री आकर चले जाते हैं, प्रधानमंत्री के आगमन की तैयारियां होती हैं — लेकिन जमीनी स्तर पर अपने अधिकारों के लिए बैठे पूर्व सैनिकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही। यह स्थिति सरकार के दोहरे चरित्र को उजागर करती है।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि हर मंच से सैनिकों के त्याग और बलिदान की बात करना आसान है,
लेकिन जब वही सैनिक अपने अधिकार और अपने क्षेत्र के भविष्य की बात करते हैं, तो उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह व्यवहार न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि अपमानजनक भी है।
संगठन ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अब इस दोहरी नीति पर भरोसा करना कठिन हो गया है। यदि सरकार वास्तव में पूर्व सैनिकों के सम्मान की बात करती है, तो उसे तुरंत धरना स्थल पर आकर वार्ता करनी चाहिए और उनकी मांगों को गंभीरता से स्वीकार करना चाहिए।
पूर्व सैनिकों ने यह भी कहा कि यह आंदोलन अब केवल एक मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सीमांत के अस्तित्व, भविष्य और सम्मान की निर्णायक लड़ाई बन चुका है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा।
आज के धरने में सीनियर सिटीजन के उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह खनका, गिरधर सिंह बिष्ट, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष चंद्रशेखर महर, सूबेदार मेजर राजेंद्र सिंह जोरा, बलवंत सिंह, आनंद सिंह बिष्ट, महादेव गिरी, नारायण दत्त भट्ट, घनश्याम जोशी, कृष्णानंद जोशी, लाल सिंह खनका तथा मोहन राम सहित अनेक पूर्व सैनिक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
पूर्व सैनिक संगठन ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन से मांग की है कि वे दिखावे की राजनीति छोड़कर जमीनी सच्चाई को समझें और पूर्व सैनिकों के साथ सम्मानजनक वार्ता कर इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकालें।














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