Home उत्तराखंड पूर्व सैनिकों का धरना 55वें दिन भी जारी — “सीमांत के भविष्य की आवाज दबाना लोकतंत्र के लिए घातक
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पूर्व सैनिकों का धरना 55वें दिन भी जारी — “सीमांत के भविष्य की आवाज दबाना लोकतंत्र के लिए घातक

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पिथौरागढ़। पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 55वें दिन भी पूरी दृढ़ता और संकल्प के साथ जारी रहा। लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन ने अब लोकतांत्रिक मूल्यों और जनभावनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

धरना स्थल पर पूर्व सैनिकों ने कहा कि आज देश में लोकतंत्र का जो स्वरूप देखने को मिल रहा है, वह अत्यंत चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। सीमांत क्षेत्र के भविष्य, जनभावनाओं और जनचेतना की आवाज को जिस प्रकार अनदेखा और दबाया जा रहा है, वह लोकतंत्र की आत्मा के विपरीत है।

पूर्व सैनिकों ने सत्ताधारी और विपक्षी दोनों ही राजनीतिक दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जहां एक ओर सत्ताधारी दल “सम्मान यात्राओं” के माध्यम से वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष अपनी भूमिका निभाने में पूरी तरह असफल साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र के लिए सशक्त विपक्ष आवश्यक होता है, लेकिन वर्तमान स्थिति में उसकी कमजोरी भी जनपद की दुर्दशा का एक बड़ा कारण बन रही है।

पूर्व सैनिकों ने यह भी कहा कि आज की राजनीति मूल मुद्दों से भटककर सीमित विषयों तक सिमटती जा रही है, जिसके कारण सीमांत क्षेत्रों की वास्तविक समस्याएं लगातार उपेक्षित हो रही हैं। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में इस जनपद का अस्तित्व और यहां के बच्चों का भविष्य गंभीर संकट में पड़ सकता है।

संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब यह आंदोलन केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर पूर्व सैनिक सड़कों पर उतरकर इस संघर्ष को जनआंदोलन का रूप देंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीमांत से उठने वाली यह आवाज एक ज्वाला बनेगी, जिसका जवाब राजनीतिक दलों, शासन-प्रशासन और सरकार को देना ही होगा।

पूर्व सैनिकों ने दो टूक शब्दों में कहा कि आज जो उपेक्षा और अनदेखी हो रही है, उसका परिणाम संबंधित पक्षों को भविष्य में अवश्य भुगतना पड़ेगा।

आज के धरने में सीनियर सिटीजन संगठन के अध्यक्ष डी.एन. भट्ट, गिरिधर सिंह बिष्ट, श्रमजीवी पत्रकार संगठन के उपाध्यक्ष एवं निदेशक देवभूमि शिक्षा केंद्र के डॉ नीरज चंद्र जोशी, सूबेदार मेजर शंकर सिंह सामंत, कृष्णा जोशी, आनंद सिंह, घनश्याम जोशी, पूरन जोशी, लक्ष्मण थापा, महेंद्र सिंह तथा कैप्टन सुंदर सिंह मेहता सहित अनेक पूर्व सैनिक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

पूर्व सैनिक संगठन ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन से इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए ठोस और सम्मानजनक समाधान निकालने की मांग की है।

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