उत्तराखंड राज्य के जनपद पिथौरागढ़ में स्थापित पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिकों का धरना आज दूसरे दिन भी पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहा। विपरीत मौसम, ठंड एवं लगातार हो रही बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक धरना स्थल पर डटे रहे, जो यह दर्शाता है कि यह आंदोलन केवल मांग नहीं बल्कि सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।
धरने को समर्थन देते हुए मोहित चोसाली (पार्षद, रई वार्ड) एवं भूपेंद्र सिंह कठायत (पार्षद, शिव बिहार कॉलोनी वार्ड) भी धरना स्थल पर पहुंचे और पूर्व सैनिकों की मांगों को पूरी तरह जायज बताते हुए सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।
धरने के दौरान पूर्व सैनिकों ने सरकार, शासन-प्रशासन एवं प्रदेश सरकार पर गंभीर उपेक्षा के आरोप लगाए। कई दिनों से आंदोलन जारी होने के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि द्वारा ठोस आश्वासन न दिया जाना, पूर्व सैनिकों के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता को उजागर करता है। इसी कारण धरना स्थल पर हर वर्ग में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
इस धरने की सबसे पीड़ादायक तस्वीर तब सामने आई जब 1971 का युद्ध लड़ चुके वयोवृद्ध पूर्व सैनिक कैप्टन उमेद सिंह एवं सूबेदार मेजर गिरधर सिंह साहब अस्वस्थ स्वास्थ्य के बावजूद धरने में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि
*“हम दवा खाकर, विपरीत मौसम में भी धरने पर बैठे हैं। यह सरकार के लिए शर्म और निंदा का विषय है कि जिन सैनिकों ने देश के लिए अपना सर्वस्व दिया, आज उन्हें अपनी ही धरती पर सम्मान की मांग के लिए धरने पर बैठना पड़ रहा है।”
संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पर्यावरण बटालियन के विस्थापन पर शीघ्र सकारात्मक एवं स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया, तो पूर्व सैनिक संगठन आम जनमानस को साथ लेकर आंदोलन को और उग्र रूप देने के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
आज के धरना प्रदर्शन में मातृशक्ति की भी सक्रिय भागीदारी रही। धरने में दीपा जोशी, प्रमिला बोहरा सहित
कमलेश जोशी, महेश पाण्डेय, त्रिलोक सिंह, गिरधर सिंह खनका, ललित रावत, राजेंद्र जोरा, बलवंत सिंह तथा सूबेदार मेजर विजनेंद्र सिंह मेहता सहित अनेक पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।














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