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पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिकों का धरना तीसरे दिन भी जारी

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उत्तराखंड राज्य के जनपद पिथौरागढ़ धरना स्थल में

पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिकों का धरना तीसरे दिन भी जारी

*विभिन्न संगठनों का मिल रहा व्यापक समर्थन, सरकार को चेतावनी*


जनपद पिथौरागढ़ में स्थापित 130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन द्वारा चलाया जा रहा धरना आज तीसरे दिन भी पूरी मजबूती और अनुशासन के साथ जारी रहा। इस राष्ट्रहित से जुड़े आंदोलन को जनपद के विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं नागरिक संगठनों का निरंतर और व्यापक समर्थन प्राप्त हो रहा है।
आज के धरने में *सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी, उत्तराखंड क्रांति दल, समानता मंच,राज्य आंदोलनकारियों, पतंजलि योग समिति सहित अनेक सक्रिय संगठनों एवं समितियों* ने सहभागिता करते हुए पूर्व सैनिकों के इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया। बड़ी संख्या में आम जनमानस, बुद्धिजीवी वर्ग एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने धरना स्थल पर पहुंचकर इसे जनआंदोलन का रूप दिया।


पूर्व सैनिक संगठन ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह आंदोलन सिर्फ एक बटालियन के स्थानांतरण का विरोध नहीं, बल्कि पूर्व सैनिकों के आत्मसम्मान, क्षेत्रीय सुरक्षा और राष्ट्रहित की लड़ाई है। भीषण ठंड के बावजूद दूर-दराज़ क्षेत्रों से आए 70–80 वर्ष से अधिक आयु के वयोवृद्ध पूर्व सैनिक, जो नियमित रूप से दवाइयों के सहारे जीवन यापन कर रहे हैं, चिकित्सकीय सलाह के विपरीत भी इस धरने में प्रतिदिन बैठने को मजबूर हैं। वे इसे *एक सैनिक की तरह अंतिम सांस तक लड़ी जाने वाली लड़ाई मान रहे हैं*।


संगठन ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब तक शासन–प्रशासन एवं प्रदेश सरकार द्वारा कोई ठोस आश्वासन या निर्णय सामने नहीं आया है, जिससे पूर्व सैनिकों और आम जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
*संगठन ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि धरने के दौरान किसी भी पूर्व सैनिक या नागरिक के स्वास्थ्य अथवा जीवन को कोई भी क्षति पहुंचती है, तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन, प्रशासन एवं सरकार की होगी*।
पूर्व सैनिक संगठन ने यह भी कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र ही अपना निर्णय वापस नहीं लिया और पूर्व सैनिकों की भावनाओं की अनदेखी जारी रही, तो संगठन आंदोलन को और अधिक व्यापक, उग्र एवं निर्णायक रूप देने के लिए बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार की होगी।
धरने में उपस्थित सभी संगठनों एवं नागरिकों ने एक स्वर में सरकार के इस निर्णय की कड़ी निंदा करते हुए पर्यावरण बटालियन के विस्थापन प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करने की मांग की तथा निर्णय वापसी तक आंदोलन को निरंतर समर्थन देने का संकल्प लिया।
आज सैकड़ों पूर्व सैनिकों, आम नागरिकों एवं बुद्धिजीवियों ने इस धरने को राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सैनिकों के गौरव का प्रतीक बताते हुए इसे जनआंदोलन का रूप दिया।

आज धरने को समर्थन देने वालों में श्री राम सिंह, यूकेडी, महानगर अध्यक्ष, गिरीश जोशी, यूकेडी महामंत्री, चंद्र शेखर कापड़ी, संरक्षक यूकेडी, गिरीश जोशी, यूथ अध्यक्ष, यूकेडी, भास्करानंद जोशी, महामंत्री, आल इंडिया सीनियर सिटीजन एवं अध्यक्ष पेंशनर्स एसोसिएशन,श्री दयानंद भट्ट, अध्यक्ष सीनियर सिटीजन, पिथौरागढ़, आर एस खनका, महिपाल सिंह दिवाल, सुरेश चंद्र जोशी, के एस भाटिया, लक्ष्मी दत्त तिवारी, सीनियर सिटीजन आल इंडिया, रमेश सिंह बिष्ट पूर्व जिला अध्यक्ष समाजवादी पार्टी, प्रकाश चंद्र जोशी राज्य आंदोलनकारी, विपिन जोशी अध्यक्ष पतंजलि योग समिति पिथौरागढ़, चंद्रशेखर भट्ट, विशन सिंह मेहरा (बीएसएफ), दीपा जोशी, प्रमिला बोहरा, दीपा चुफाल सहित
पूर्व सैनिक संगठन के कैप्टेन दिवान सिंह, उमेश फुलेरा,सुरेश कापडी, प्रेम बल्लभ सहित सैकड़ो पूर्व सैनिक तथा आम जनमानस मौजूद रहे।

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