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पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के खिलाफ आंदोलन उग्र, 34वें दिन भी जारी—सड़कों पर उतरने और बड़े जनांदोलन की चेतावनी

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पिथौरागढ़।
130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 34वें दिन भी उसी जोश, जज्बे और दृढ़ संकल्प के साथ जारी रहा। प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद आंदोलन लगातार व्यापक होता जा रहा है और अब यह जनांदोलन का रूप ले चुका है।

धरना स्थल पर आज बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों, विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने पहुंचकर अपना नैतिक समर्थन दिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह मुद्दा केवल पूर्व सैनिकों का नहीं, बल्कि पूरे जनपद के भविष्य, पर्यावरण सुरक्षा और अस्तित्व से जुड़ा हुआ है। इस निर्णय को जनपद के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए हर स्तर पर संघर्ष का समर्थन करने की बात कही गई।

आज धरने को 12 कुमाऊं रेजीमेंट के पूर्व सैनिकों के साथ-साथ उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी, जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर पुनेड़ा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया। साथ ही सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के अध्यक्ष डी एन भट्ट ,,कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश कापड़ी सहित कई गणमान्य लोगों ने भी आंदोलन की अगली रणनीति को और धार देने पर जोर दिया।

लगातार शासन-प्रशासन की अनदेखी और उदासीनता से पूर्व सैनिकों में आक्रोश दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही विस्थापन का निर्णय निरस्त नहीं किया गया, तो आंदोलन को सड़कों पर उतारते हुए विशाल रैली और उग्र जनांदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

संगठन ने जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनकी दूरी जनता के साथ विश्वासघात है। इसकी कड़ी आलोचना करते हुए पूर्व सैनिकों ने कहा कि अब समय आ गया है जब जनता स्वयं अपने अधिकारों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ेगी।

पूर्व सैनिक संगठन ने आगामी 2027 के चुनावों के बहिष्कार की भी घोषणा की है। इसके तहत हस्ताक्षर अभियान चलाकर शपथ पत्र के माध्यम से चुनाव बहिष्कार का लिखित संकल्प लिया जाएगा और इसे चुनाव आयोग को भेजा जाएगा। संगठन का कहना है कि जो सरकार अपने सैनिकों और उनके योगदान की उपेक्षा करती है, उसे लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।

धरने में मौजूद पूर्व सैनिकों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जिस सैनिक वर्दी पर उन्हें गर्व था, आज वही सम्मान सरकार की नीतियों के कारण आहत हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब यह लड़ाई सम्मान, अस्तित्व और भविष्य की है, जिसे किसी भी कीमत पर लड़ा जाएगा।

आज के धरने में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों के साथ सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, उत्तराखंड क्रांति दल के कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता, तथा पूर्व सैनिक संगठन के दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।

*“यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है—या तो फैसला वापस होगा, या फिर सड़कों पर जनसैलाब उतरेगा।”

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