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पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में एकजुट हुए पूर्व सैनिक 26 जनवरी से आंदोलन की चेतावनी

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पिथौरागढ़ में स्थापित 130 पर्यावरण बटालियन को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में आज जनपद के पूर्व सैनिक एकजुट होकर सशक्त स्वर में सामने आए। पर्यावरण संरक्षण एवं क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर विषय को लेकर जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में पूर्व सैनिकों द्वारा प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन प्रस्तुत किए गए।

धारचूला क्षेत्र में क्षेत्र अध्यक्ष कैप्टन भूपाल सिंह के नेतृत्व में पूर्व सैनिकों ने उप जिलाधिकारी धारचूला को ज्ञापन सौंपा।

डीडीहाट क्षेत्र में क्षेत्र संयोजक गणेश कन्याल की अध्यक्षता में एसडीएम डीडीहाट के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया गया।

मुनस्यारी क्षेत्र पर क्षेत्र अध्यक्ष कैप्टन दीगर सिंह दानू साहब के नेतृत्व पर एस डी एम मुनस्यारी के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया गया

वहीं जनपद मुख्यालय पिथौरागढ़ में संगठन अध्यक्ष मयूख भट्ट के नेतृत्व में पूर्व सैनिकों ने जिलाधिकारी महोदय के माध्यम से केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भारत सरकार तथा मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार को ज्ञापन भेजकर पर्यावरण बटालियन के विस्थापन को तत्काल रोकने की मांग की।

पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह विषय केवल एक बटालियन के स्थानांतरण का नहीं, बल्कि सीमांत जनपद की पर्यावरणीय सुरक्षा, स्थानीय रोजगार और रणनीतिक महत्व से जुड़ा है। लंबे समय से पूर्व सैनिक इस मुद्दे को उठा रहे हैं, किंतु अब तक केंद्र अथवा राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या संवाद नहीं किया गया, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
आज सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस जैसे गौरवपूर्ण अवसर पर, जो शौर्य, बलिदान और सम्मान का प्रतीक है, पूर्व सैनिकों को अपने अधिकारों और क्षेत्रहित के लिए ज्ञापन देना पड़ रहा है—यह स्थिति गंभीर चिंतन का विषय है।
पूर्व सैनिकों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस विषय को लेकर केंद्र व राज्य सरकार ने शीघ्र गंभीरता नहीं दिखाई, तो आगामी 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) जैसे ऐतिहासिक दिन से व्यापक आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
पूर्व सैनिकों ने दो टूक कहा कि उन्होंने देश की सेवा निस्वार्थ भाव से की है और आज भी पर्यावरण, सीमांत सुरक्षा और जनहित के लिए संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेंगे। यदि उनकी आवाज़ को अनसुना किया गया तो वे लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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