उत्तराखंड राज्य के
पिथौरागढ़ जनपद में पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 51वें दिन में प्रवेश कर गया।
लंबे समय से जारी इस शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद शासन-प्रशासन और सरकार की निरंतर अनदेखी ने पूर्व सैनिकों के आक्रोश को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।
धरना स्थल पर आज पूर्व सैनिकों का रोष साफ तौर पर देखने को मिला।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि एक ओर सरकार “सम्मान यात्राओं” की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर वास्तविक सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे पूर्व सैनिकों की पूरी तरह उपेक्षा की जा रही है। यह दोहरा रवैया न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि सैनिकों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला भी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि पूरे जनपद के भविष्य, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल न होना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
पूर्व सैनिकों ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि यदि सरकार इसी प्रकार मौन बनी रही, तो इस अनदेखी और उपेक्षा का खामियाजा उसे अवश्य भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब केवल मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है, जिसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
धरना स्थल पर आज विभिन्न सामाजिक संगठनों और गणमान्य व्यक्तियों का भी समर्थन देखने को मिला, जिससे आंदोलन को और मजबूती मिली।
आज के धरने में सीनियर सिटीजन के उपाध्यक्ष राजेंद्र खनका, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष चंद्रशेखर महर, सूबेदार मेजर गणेश दत्त पाण्डेय, दिनेश धामी, जगदीश भट्ट, जगत सामंत, उमेश फुलेरा, धर्म सिंह, लाल सिंह सहित कैप्टन सुरेश पुनेरा (सेना मेडल) सहित अनेक पूर्व सैनिक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
*पूर्व सैनिक संगठन ने पुनः सरकार और प्रशासन से शीघ्र वार्ता कर सम्मानजनक समाधान निकालने की मांग की है।*














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