पिथौरागढ़। पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 57वें दिन में प्रवेश कर गया। लगातार दो माह से अधिक समय से अपने सम्मान, अधिकार और सीमांत के भविष्य के लिए संघर्षरत पूर्व सैनिकों का धैर्य अब आक्रोश में बदलता नजर आ रहा है।
धरना स्थल पर पूर्व सैनिकों ने एक स्वर में कहा कि जिस प्रकार से उनकी न्यायोचित मांगों को लगातार अनदेखा किया जा रहा है, वह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी विपरीत है। एक ओर सरकार “सम्मान यात्राओं” और बड़े-बड़े आयोजनों के माध्यम से सैनिकों के सम्मान की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर अपने ही जनपद में बैठे पूर्व सैनिकों की आवाज को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि यह दोहरा रवैया अब किसी से छिपा नहीं है। मंचों से सम्मान और धरातल पर अपमान — यही वर्तमान व्यवस्था की सच्चाई बन चुकी है। रक्षा से जुड़े उच्च पदों के आगमन और बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों के बावजूद यदि पूर्व सैनिकों की समस्याओं पर कोई पहल नहीं होती, तो यह स्थिति और भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि सीमांत जनपद के अस्तित्व, पर्यावरण, रोजगार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए है। इसके बावजूद लगातार उपेक्षा यह दर्शाती है कि जनहित के मुद्दे राजनीतिक प्राथमिकताओं से बाहर होते जा रहे हैं।
पूर्व सैनिकों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही सरकार द्वारा ठोस पहल नहीं की गई, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप धारण करेगा। अब यह संघर्ष केवल धरना स्थल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनआंदोलन के रूप में पूरे क्षेत्र में फैलाया जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और सरकार की होगी।
संगठन ने एक बार फिर दो टूक शब्दों में कहा कि दिखावे की राजनीति और “सम्मान यात्राओं” से वास्तविक सम्मान नहीं मिलता। इसके लिए संवेदनशीलता, संवाद और ठोस निर्णय आवश्यक हैं। सरकार को चाहिए कि वह तुरंत पूर्व सैनिकों के साथ वार्ता कर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय ले।
पूर्व सैनिकों ने यह भी कहा कि यदि उनकी आवाज को इसी प्रकार दबाया जाता रहा, तो वे जन-जन तक सरकार की कथनी और करनी का अंतर उजागर करेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देंगे।
आज जाने पर संगठन सचिव दयाल सिंह,दिवाकर सिंह,धर्म सिंह, ललित जोशी, जोरा सिंह, महेश चंद, शहीद दर्जनों पूर्व सैनिक मौजूद रहे।
पूर्व सैनिक संगठन ने पुनः शासन-प्रशासन एवं सरकार से अपील की है कि इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए सम्मानजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि सीमांत जनपद की गरिमा, भविष्य और विश्वास बना रहे।














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