पूर्व सैनिक संगठन, पिथौरागढ़
130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन का धरना आज 35वें दिन भी अडिग संकल्प, जोश और आक्रोश के साथ जारी रहा। 
लगातार 35 दिनों से अपने सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे पूर्व सैनिकों ने इस पूरे प्रकरण को सरकार की घोर विफलता और संवेदनहीनता का जीता-जागता प्रमाण बताया।
पूर्व सैनिकों ने कड़े शब्दों में कहा कि कल जिस प्रकार रक्षा मंत्री कुमाऊं की वीरभूमि पर आकर सैनिकों की वीरता की गाथाएं पढ़ रहे थे, वह केवल वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित एक खोखला प्रयास था। एक ओर मंचों पर वीरता का गुणगान, और दूसरी ओर उसी भूमि के पूर्व सैनिक अपने सम्मान के लिए धरने पर बैठे हैं—यह दोहरा चरित्र अब असहनीय हो चुका है।
संगठन ने प्रदेश सरकार और जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उत्तराखंड को केंद्र सरकार की कठपुतली बनाकर रख दिया गया है। यहां के जनप्रतिनिधि सत्ता के मोह में इतने बंध चुके हैं कि उनमें अपने ही सैनिकों के सम्मान के लिए आवाज उठाने की इच्छाशक्ति और साहस समाप्त हो चुका है।
पूर्व सैनिकों ने यह भी आरोप लगाया कि जिस प्रकार देश में पर्यावरण के नाम पर पहाड़ों और संसाधनों का दोहन किया जा रहा है, उसी कड़ी में पिथौरागढ़ जैसे अति संवेदनशील जनपद से 130 पर्यावरण बटालियन को गुजरात स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है।
यह न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि इस सैन्य भूमि के गौरव और सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है।
पूर्व सैनिकों ने इसे पहाड़ की सबसे बड़ी पीड़ा बताते हुए कहा कि एक सैनिक अपने स्वाभिमान और सम्मान के लिए 35 दिनों से धरने पर बैठा है, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं—इससे बड़ी नाकामी इस प्रदेश और देश के लिए कोई और नहीं हो सकती।
संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब आंदोलन निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।
“हमने मोर्चे पर अपनी तैनाती ले ली है, अब पीछे हटने का कोई विकल्प नहीं है।”*
आगामी कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए बताया गया कि:
– धरना स्थल पर “सद्बुद्धि भजन” का आयोजन किया जाएगा।
– इसके पश्चात जनपद स्तर पर एक विशाल रैली निकाली जाएगी, जिसमें पूर्व सैनिक अपने शौर्य के प्रतीक मेडल के साथ भाग लेंगे।
संगठन ने कड़ी चेतावनी दी कि यदि इसके बावजूद भी सरकार ने इस मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो पूर्व सैनिक अपने मेडल जिलाधिकारी के माध्यम से रक्षा मंत्री को वापस भेज देंगे।
इसके साथ ही यह भी ऐलान किया गया कि आने वाले राष्ट्रीय पर्वों पर पूर्व सैनिक अपने मेडल की जगह काली पट्टी धारण करेंगे—जो इस सैन्य प्रदेश के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति होगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार व जनप्रतिनिधियों की होगी।
आज धरना स्थल पर सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के गिरधर सिंह, राजेंद्र सिंह तथा शिक्षण संस्थान के संस्थापक/संचालक भगवान सिंह बिष्ट ने पहुंचकर आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन दिया।
इस अवसर पर संगठन के सचिव दयाल सिंह, गिरधर खनका, हर सिंह मेहता, प्रहलाद सिंह,नवीन गुरुरानी ,राजेंद्र जोरा, दिवाकर सिंह सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
*पूर्व सैनिक संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब यह लड़ाई आर-पार की है—और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन और अधिक उग्र, व्यापक और निर्णायक रूप लेता जाएगा।














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