पिथौरागढ़।
पूर्व सैनिक संगठन द्वारा 130 प्रादेशिक सेना पर्यावरण बटालियन के पिथौरागढ़ से विस्थापन के विरोध में चलाया जा रहा क्रमिक धरना आज लगातार दूसरे दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। 
धरने में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों एवं जनसामान्य की सहभागिता रही।
पूर्व सैनिक संगठन के पदाधिकारियों एवं उपस्थित सैनिकों ने कहा कि यह मुद्दा केवल एक सैन्य इकाई के स्थानांतरण का नहीं, बल्कि सीमांत जनपद पिथौरागढ़ की सुरक्षा, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण एवं हिमालय की रक्षा से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय सीमांत क्षेत्र के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इसके विरुद्ध संघर्ष को अब और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।
पूर्व सैनिक संगठन ने निर्णय लिया है कि आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप देते हुए अब गांव-गांव एवं क्षेत्र-क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा तथा पर्यावरण बटालियन के समर्थन में जनसभाएं एवं रैलियां आयोजित की जाएंगी।
संगठन ने कहा कि यह हमारे बच्चों के भविष्य, सीमांत जनपद की सुरक्षा और हिमालय के पर्यावरण संरक्षण का सवाल है, जिस पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संगठन ने यह भी जानकारी दी कि जल्द ही पूर्व सैनिक संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल देहरादून जाकर सैनिक कल्याण मंत्री, मुख्यमंत्री महोदय एवं संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगों को मजबूती से रखेगा तथा 130 पर्यावरण बटालियन के स्थानांतरण आदेश को निरस्त करने की मांग करेगा।
आज के धरने को नारी शक्ति एवं पतंजलि योग समिति के सदस्यों द्वारा भी समर्थन प्रदान किया गया। धरने में पूर्व सैनिक संगठन के 1971 युद्ध के योद्धा कैप्टन उम्मेद सिंह, महेश पांडे हरीश पंत, गोपाल सिंह, प्रहलाद सिंह, मोहन द्विवेदी उमेश फुलेरा सहित देवलथल क्षेत्र से किशन सिंह दीपा जोशी प्रमिला बोरा दीपा चुफाल सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
पूर्व सैनिक संगठन ने जनपदवासियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में आगे आकर इस जनहित के आंदोलन में सहभागिता करें और सीमांत जनपद के हितों की रक्षा हेतु एकजुट हों।














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