पिथौरागढ़
*पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिकों का धरना पांचवें दिन भी जारी*
पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन द्वारा संचालित धरना आज पांचवें दिन भी पूर्ण मजबूती और संकल्प के साथ जारी रहा। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पूर्व सैनिकों का जोश और एकजुटता आंदोलन को निरंतर व्यापक स्वरूप दे रही है।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि अब इस आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं जनभागीदारी आधारित बनाया जाएगा। इसके लिए गांव–गांव रैलियों के माध्यम से अभियान चलाने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। आगामी दिनों में आंदोलन को और विस्तृत रूप दिया जाएगा, ताकि जनपद की आवाज प्रदेश और देश की राजधानी तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
वक्ताओं ने कहा कि चुनाव के समय पूर्व सैनिकों और सीमांत क्षेत्र के नाम पर राजनीति करने वाले जनप्रतिनिधियों का आज धरना स्थल से दूर रहना कथनी और करनी के अंतर को उजागर करता है। जब सीमांत की अस्मिता और पूर्व सैनिकों के सम्मान का प्रश्न खड़ा है, तब जनप्रतिनिधियों की चुप्पी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। संगठन ने प्रदेश की राजधानी देहरादून से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक शासन-प्रशासन के इस मुद्दे पर मौन रहने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
आज के धरने को उत्तराखंड क्रांति दल तथा सीनियर सिटीजन एसोसिएशन का समर्थन प्राप्त हुआ। संगठनों के पदाधिकारियों ने आंदोलन के साथ मजबूती से खड़े रहने और हर सार्थक प्रयास में सहयोग देने का आश्वासन दिया।
धरना स्थल पर सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के अध्यक्ष डी एन. भट्ट, उपाध्यक्ष आर. एस. खनका, सलाहकार के.बी. जोशी, तथा उत्तराखंड क्रांति दल महानगर अध्यक्ष राम सिंह उपस्थित रहे।
पूर्व सैनिक संगठन के कैप्टन उमेश फुलेरा, राजेंद्र जोरा, घनश्याम जोशी, जगत सिंह, सुरेंद्र कोरंगा, राजेंद्र कार्की, प्रमिला बोहरा, दीपा चुपाल, दीपा जोशी, विक्रम सिंह (सेना मेडल) सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
पूर्व सैनिक संगठन ने दोहराया कि जब तक पर्यावरण बटालियन के विस्थापन का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा और इसे निर्णायक मोड़ तक पहुंचाया जाएगा।
पूर्व सैनिक संगठन, पिथौरागढ़














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